बांदा। राजकीय मेडिकल कॉलेज से लाखों रुपये के चोरी गए पल्स ऑक्सीमीटर और ऑक्सीजन सिलिंडरों की वसूली प्रभारियों से की जाएगी। इसकी तैयारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शुरू कर दी है। हाल ही में तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने चोरी गए स्वास्थ्य उपकरणों के लिए कई विभागों के 12 प्रभारियों को जिम्मेदार बताया है। अपनी रिपोर्ट कालेज प्रशासन समेत बड़े अफसरों को सौंप दी है। चोरी गए उपकरणों की कीमत लगभग तीन लाख रुपये बताई गई है।
कोरोना की दूसरी लहर में एक तरफ मरीज ऑक्सीजन के लिए जिंदगी की जंग लड़ रहे थे तो वहीं कुछ स्वास्थ्य कर्मी या तीमारदार आपदा को अवसर में बदलकर मौके का फायदा उठा रहे थे। चित्रकूटधाम मंडल के एकलौते राजकीय मेडिकल कॉलेज से लगभग 200 ऑक्सीमीटर और 70 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर चोरी हो गए थे। इसका खुलासा मई माह में अभिलेखों के मिलान से हुआ था। अमर उजाला ने उपकरणों के गायब होने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने हाल ही में कालेज प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी है। इसमें उपकरणों के गायब हो जाने की पुष्टि की गई है। साथ ही इसके लिए मेडिकल कालेज के वार्ड से लेकर कई विभागों के प्रभारियों को जिम्मेदार बताया गया। कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कालेज प्रशासन ने जिम्मेदार प्रभारियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनके वेतन से कटौती कर उपकरणों के कीमत की भरपाई की तैयारी है। गायब 200 ऑक्सीमीटर की कीमत लगभग 2.10 लाख और 25 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत करीब 65 हजार रुपये बताई गई है।।
डीएम के निर्देश पर गठित हुई थी कमेटी
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य ने बताया कि डीएम आनंद कुमार सिंह के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित हुई थी। इसमें एडीएम (नमामि गंगे), सीओ सिटी और मेडिकल कालेज के एचओडी डा. सुनील आर्या शामिल थे। इनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभारियों के विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि अब तीसरी लहर के लिए कॉलेज के सभी डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को तैयारी में लगाया गया है।
गायब ऑक्सीमीटर पर मरीजों से भी किया संपर्क
प्रधानाचार्य डा. मुकेश यादव ने बताया कि पिछले वर्ष 300 पल्स ऑक्सीजन मीटर मिले थे। इनमें लगभग 25 खराब हो गए। इस वर्ष कोरोना मरीजों की तेजी से संख्या बढ़ने पर 185 ऑक्सीमीटर जालंधर से और मंगाए गए थे। कुल 485 ऑक्सीमीटर थे। बेड के अनुसार ऑक्सीमीटर की व्यवस्था की गई। बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में भर्ती होने वाले हरेक मरीज को ऑक्सीमीटर उपलब्ध कराए गए। इनमें से करीब 200 पल्स ऑक्सीमीटर गायब हो गए। 10 मई को रिकार्ड मिलान के दौरान इसकी जानकारी हुई। उन्होंने कहा कि कुछ पल्स ऑक्सीमीटर मरीजों के तीमारदार बिना बताए ले गए। इसकी पड़ताल अभी चल रही है। हर मरीज से संपर्क कर जमा ऑक्सीमीटर नंबर से मिलान किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक गायब उपकरण को लेकर कोई मरीज सामने नहीं आया है।
गायब उपकरणों के लिए प्रभारियों को ही जिम्मेदार माना गया है। उनके वेतन से वसूल की जाएगी। बाजार में लगभग 1000 से 1200 रुपये प्रति ऑक्सीमीटर और 2500 रुपये प्रति खाली ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत है। इसके लिए नर्सिंग स्टाफ ज्यादा जिम्मेदार है।
-डा. मुकेश कुमार यादव, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज बांदा