छठवें रोजे पर एक साथ घर में इफ्तार करता परिवार।
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बांदा। इस्लामी कैलेंडर के 9वें महीने रमजान में सहरी, रोजा, इफ्तार और अन्य इबादतों का सिलसिला जारी है। गुरुवार (30 अप्रैल) को पहले अशरे (10 दिन) का छठवां रोजा था। यह अशरा रहमत का माना जाता है। लॉकडाउन के चलते इस साल मस्जिदों में होने वाली इबादतें घरों पर ही की जा रही है।
बच्चे, महिलाएं और बूढ़े भी रोजा व इबादतों में मशगूल हैं। उलेमा लगातार मुस्लिमों को यह मशविरा दे रहे हैं कि इफ्तार और ईद की तैयारियों में फिजूलखर्ची रोककर यह पैसा इन दिनों लॉकडाउन में परेशान हाल लोगों को पहुंचाएं।
स्कूल बंद हैं। ऐसे में हम घर में रहकर पढ़ाई के साथ रमजान के रोजे और इबादत कर रहे हैं। जो बच्चे रोजे की भूख-प्यास बर्दाश्त कर सकते हों, उन्हें रोजा रखना चाहिए। अपने घर, खानदान और मुल्क की सलामती के लिए दुआओं का यह अच्छा मौका है। -अब्दुल फहद सिद्दीकी
हिजरी सन 1441 का यह माहे रमजान अब तक का सबसे बेमिसाल है। लॉकडाउन की वजह से सभी लोग फुरसत में हैं। घर पर रहकर रोजा और सभी नमाजों और तरावीह के साथ तिलावत भी हो रही है। कोरोना से मुल्क को निजात दिलाने की दुआएं कर रहे हैं। -मुर्शिद खां।
रमजान का मुकद्दस महीना एक बार फिर हमें मिला है। लॉकडाउन में भले ही कुछ दुश्वारियां हैं लेकिन इस माह मुबारक की बरकतों और फजीलत में कोई कमी नहीं है। इस साल भी इस माह रहमतों का नुजूल होगा। हमें चाहिए कि पूरे माह इबादत, तिलावत और लोगों की मदद में गुजारें। -मोहम्मद सिनान।
अब्दुल फहद सिद्दीकी।- फोटो : BANDA
मुर्शिद खां।- फोटो : BANDA
मोहम्मद सिनान।- फोटो : BANDA