किशोरी से दुष्कर्म मामले में 15 साल तक चले मुकदमे के बाद मुख्य आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 7 साल की जेल और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दुष्कर्म से गर्भवती हुई किशोरी का गर्भपात कराने में मददगार बने दो आरोपियों को 5-5 वर्ष की कैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।
मामला कमासिन थाना क्षेत्र के एक गांव का है। यहां के एक ग्रामीण ने 12 मई 2000 को पुलिस को तहरीर दी थी कि उसकी भतीजी खेत में चारा काटने गई थी। शाम लगभग 4 बजे गांव का बुद्ध विलास पुत्र रामदेव कुशवाहा बंदूक लेकर आया। उसे गोली मार देने की धमकी देकर खंडहर में ले गया और दुराचार किया।
भयवश किशोरी ने यह बात घर वालों को नहीं बताई। कुछ महीने बाद वह गर्भवती हो गई। इस पर चाचा उसे लेकर थाने गया। इसी बीच दलपा पुरवा गांव के संतोष कुमार पुत्र महराजदीन व कल्लू साहू पुत्र रामलाल साहू सहित कई लोग ट्रैक्टर में आए और किशोरी को जबरन ले जाकर उसका गर्भपात करा दिया। दूसरे दिन किशोरी परिवार को वापस मिली।
चाचा की तहरीर पर पुलिस ने धारा 376, 313, 315, 506 आईपीसी में रिपोर्ट दर्ज की। डाक्टरी परीक्षण और धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान के बाद 18 मई को पुलिस ने आरोपी बुद्ध विलास को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले की विवेचना कमासिन थाना पुलिस से लेकर सीबीसीआईडी (इलाहाबाद) को सौंप दी गई।
इसमें चारों आरोपियों के विरुद्ध अलग-अलग धाराओं में चार्जशीट दाखिल हुई। कई अदालतों में सुनवाई के बाद 18 अप्रैल 2015 को इसकी सभी पत्रावली एफटीसी कोर्ट के सुपुर्द हो गईं। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता कैलाश चौबे ने 7 गवाह पेश किए।
बुधवार को त्वरित न्यायालय के न्यायाधीश शाम कुमार ने अलग-अलग मामलों में तीनों आरोपियों को दोषी पाया। दुष्कर्म के आरोपी बुद्धविलास को धारा 376 में 7 वर्ष कैद, 40 हजार रुपये जुर्माना और धारा 506 में 3 वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
जुर्माना अदा न करने पर 6 माह अतिरिक्त जेल भुगतना होगी। गर्भपात कराने में बुद्ध विलास, संतोष कुमार व कल्लू साहू को धारा 313 में 5-5 वर्ष की कैद व 25-25 हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर 3-3 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने और जुर्माना की आधी राशि पीड़ित को मुआवजा के रूप में देने का आदेश दिया। धारा 315 आईपीसी में सभी को दोषमुक्त कर दिया गया। उधर, गर्भपात करने के मामले में आरोपी महिला की पत्रावली पृथक कर सीजेएम न्यायालय में भेजी गई है।