बांदा। कालिंजर दुर्ग की सुरक्षा चौकी के रूप में 18वीं सदी में निर्मित जलीय दुर्ग रनगढ़ का अब पीपीपी मोड पर विकास होगा। पर्यटन स्थल घोषित होने के बाद इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्यटन विभाग मुख्य मार्ग से दुर्ग तक संपर्क मार्ग, पार्किंग और शौचालय बनवाएगा। साथ ही 5.81 करोड़ की लागत से रिवर फ्रंट भी बनवाया जा रहा है। शासन ने यहां के विकास के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
नरैनी तहसील मुख्यालय से दस किलोमीटर दूर स्थित रनगढ़ दुर्ग चार एकड़ में है। इस दुर्ग को चरखारी के राजा ने रिसौरा रियासत की रक्षा के लिए बनवाया था। बाद में पन्ना नरेश महाराजा छत्रसाल के अधीन हो गया। केन नदी की बीच धारा में चट्टानों पर बने इस किले तक कोई संपर्क मार्ग न होने से यह कभी बदमाशों की शरणस्थली रहा है। अब इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग को शासन ने संपर्क मार्ग के लिए 15 करोड़ रुपये और रिवर फ्रंट बनाने के लिए 5.81 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस को नामित कर कार्य भी शुरू करा दिया है। करीब 30 फीसदी काम हो चुका है। बारिश और बाढ़ के कारण सप्ताह भर से काम रुका है। बताया कि मुख्य मार्ग से दुर्ग तक संपर्क मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके अलावा केन नदी पर बनने वाले घाट (रिवर फ्रंट) पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। यहां पार्किंग और शौचालय भी बनवाए जा रहे हैं। इसे पीपीपी माॅडल से विकसित किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटक बच्चों का बर्थडे मना सकेंगे और शादी-ब्याह के भी आयोजन होंगे।
दो दशक पूर्व जलधारा में मिली थी तोप
करीब दो दशक पूर्व दुर्ग की जलधारा से तोप बरामद हुई थी, जिसे मध्य प्रदेश शासन ने कब्जे में ले रखी है। दो मंजिला दुर्ग की चट्टानों से बनी दीवारें काफी ऊंची हैं। प्रत्येक दिशा में तीन-तीन दरवाजे हैं। दीवारों में छेद हैं जिनसे शत्रुओं को देखा जाता था। आपात स्थिति में बाहर निकालने के लिए कई सुरंगें भी बनाई गई थीं। 1992 में केन नदी में भारी बाढ़ से पुंगरी का पुल बह गया था, पर रनगढ़ का दुर्ग नहीं डूबा था।
वर्जन-
जलीय दुर्ग रनगढ़ में सुविधाएं विकसित होने के बाद पर्यटक आकर्षित होंगे। केन नदी के बीच होने से यहां का विहंगम दृश्य देखने लायक होता है। अभी रिवर फ्रंट व संपर्क मार्ग पर काम चल रहे हैं। -अनुपम श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, चित्रकूट धाम मंडल।