जेएन डिग्री कालेज सभागार में गुरुवार को सांस्कृतिक प्रतियोगिता के मौके पर दिवारी (पाई-डंडा) की धूम रही। प्रतियोगिता में बड़ोखर खुर्द के रमेश पाल की टीम को पहला स्थान मिला। उद्घाटन एडीएम गंगाराम गुप्ता ने किया।
उन्होंने कहा कि दिवारी नृत्य बुंदेलखंड की प्राचीन विधा है। बुंदेलखंड के अलावा यह कहीं देखने को नहीं मिलती। निर्णायक समिति ने बड़ोखर बुजुर्ग के चंद्रपाल सिंह की टीम को दूसरा और नवाब टैंक बांदा के संतू राजपूत की टीम को तीसरा स्थान दिया। सूचना विभाग के उप निदेशक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि दिवारी नृत्य प्राचीन विधा है।
यह गोवर्धन पर्वत को उठाने की घटना से जुड़ा है। साथ ही लाठी चलाना आत्मरक्षा और वीरता का प्रतीक है। संचालन संजय काकोनिया ने किया। निर्णायकों में क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी रामनरेश पाल, जेएन डिग्री कालेज प्राचार्य डा. नंदलाल शुक्ल, शिव प्रेम याज्ञिक, घनश्याम गुप्ता, धनंजय सिंह, जेपी यादव, शारदा निषाद, अंगद शर्मा आदि शामिल रहे।