अतर्रा। खुरहंड में आयोजित रामकथा का 8वें दिन सोमवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथा वाचक प्रेमभूषण महाराज ने सती अनुसुइया व रावण वध प्रसंग सुनाते हुए रामचरित मानस ग्रंथ की व्याख्या की।
वैदेही वल्लभशरण की अध्यक्षता में भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रकाश द्विवेदी के अनुज स्वर्गीय कैलाश द्विवेदी की पुण्य तिथि पर हुई कथा के अंतिम दिन कथा वाचक ने कहा कि रामचरित मानस पूजने का नहीं है बल्कि जीवन में उतारने का ग्रंथ है। रामभजन असली सेवा है। प्रभु राम जब चित्रकूट से अत्रिमुनि के आश्रम गए वहां अनुसुइया ने सीता को पतिव्रत धर्म पालन की शिक्षा दी। कबंध का उद्धार किया।
सरभंगा ऋषि और अगस्त मुनि के आश्रम जाकर आशीर्वाद लिया। अगस्त मुनि ने राम को रावण वध के लिए बाण दिए। लगभग 12 वर्ष चित्रकूट में गुजारने के बाद राम दक्षिण दिशा को रवाना हुए। पंचवटी में कुटिया बनाकर रहने लगे। वहीं पर राम ने सीता को कुछ दिन अग्नि में वास कर राक्षसों का वध करने की लीला रची। रावण ने सीता की जगह उनकी छाया का अपहरण किया।
यजमान पंडित रामयश द्विवेदी, प्रकाशचंद्र द्विवेदी व सुशील द्विवेदी ने व्यासपीठ की आरती उतारी। सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, पूर्व विधायक युवराज सिंह, वीरेंद्र चतुर्वेदी, पुष्कर द्विवेदी, संदीप मकरारिया, राजभवन उपाध्याय, बबलू भोडवले, रामू गुप्ता, प्रदीप द्विवेदी, रामजी, श्यामजी, मुकुंदलाल, देवांशयश द्विवेदी, अनंतयश द्विवेदी, अंशिका द्विवेदी, सुरेंद्र पाठक, अजय, बालमुुकुंद शुक्ला, दिनेश खरे, विमल शर्मा, प्रेमनारायण द्विवेदी, बड़कू अवस्थी आदि मौजूद रहे।