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न भूले हैं न भूलेंगे हसन और हुसैन की कुर्बानी

Mon, 10 Oct 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
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मोहर्रम की आठवीं पर बांदा में कोतवाली के सामने मेंहदी ताजिया का मेला। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। ‘न भूले हैं न भूलेंगे हसन और हुसैन की कुर्बानी, न मिटी है न मिटेगी फात्मा जहरा की निगेबानी’। शहीदाने कर्बला को ऐसे ही मरसिया और सोजख्वानी से याद करने का सोमवार को आठवां दिन बीत गया।
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आठवीं पर परपंरा के मुताबिक मेंहदी ताजिया निकाले गए। कोतवाली के सामने भारी भीड़ का मेला लगा और आधा दर्जन मेंहदी ताजियों के मिलाप की रस्म बाजेगाजे के साथ अदा की गई। सौहार्द की वरासत को रखते हुए जगह-जगह हिंदू और मुस्लिमों ने लंगर लुटाया। उधर, पूर्वी कोठी समेत शिया इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला जारी रहा।

सोमवार को सुबह कुंजरहटी (मर्दननाका) से सब्जी फरोश बिरादरी और अलीगंज से कुदउवा जनाना, दरी मोहाल से बुनकर बिरादरी और अलीगंज से टिर्री व मंसूरी बिरादरी के ताजिए मेंहदी ढोल ताशों की गूंज के बीच कोतवाली के सामने इकट्ठा हुए। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के मद्देनजर ताजिए जुलूस सुबह जल्दी निकाले गए। कोतवाली के सामने भी बहुत देर तक पड़ाव नहीं हुआ।
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मिलाप की रस्म होते ही तीन-तीन ताजियों के दो जत्थों अलग-अलग रूटों पर निकल पड़े। जगह-जगह छतों से भीड़ पर लड्डू फेंककर लंगर किया गया। कालवनगंज, छिपटहरी, मर्दननाका, कुंजरहटी, अलीगंज, गूलरनाका आदि इलाकों में लंगर हुए।

दोपहर के पहले ही यह सभी ताजिए अपने-अपने ठिकानों पर रख दिए गए। अब मंगलवार को नवमीं मोहर्रम मनाई जाएगी। इस रात दहकते अंगारों को हाथों से लुटाकर अलाव खेला जाएगा। रात भर ढाल सवारियों के जुलूस शहर में घूमेंगे। पूर्व संध्या से ही अलाव के गड्ढे खोदकर तैयार कर दिए गए।
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