बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में कम पानी से खेतों की
सिंचाई के लिए उद्यान विभाग ने किसानों को रेन गन (लार्ज वैक्यूम) उपकरण
उपलब्ध कराने की योजना शुरू की है। रेन गन यानी बारिश करने वाली बंदूक 62
से 70 फीसदी अनुदान पर मिलेगी।
उद्यान विभाग का दावा है कि इससे 50
फीसदी पानी की बचत होगी। डीजल और मजदूरी का खर्च भी बचेगा। रेन गन के लिए
किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस साल रेन गन से 500
हेक्टेयर की सिंचाई का लक्ष्य है।
उद्यान विभाग में चल रही
स्प्रिंकलर ड्रिप सिंचाई योजना का नाम बदलकर शासन ने अब इसे प्रधानमंत्री
कृषि सिंचाई योजना कर दिया है। सूखोन्मुख विकास कार्यक्रम (डीपीएपी) के तहत
किसानों को अनुदान पर स्प्रिकंलर सेट दिए जा रहे हैं।
पिछले तीन
सालों से चल रही योजना में किसानों को पोर्टेबल तथा मिनी स्प्रिंकलर दिए जा
रहे हैं, लेकिन इस वर्ष किसानों को रेन गन का इस्तेमाल करने के लिए
प्रेरित किया जा रहा है। इसका प्रयोग हरियाणा और पंजाब में हो रहा है। प्
रदेश
सरकार ने बुंदेलखंड के लिए रेन गन का लक्ष्य निर्धारित किया है। सूखे से
ग्रस्त ब्लाकों में लघु सीमांत किसानों को 70 फीसदी अनुदान पर तथा सामान्य
किसानों को 57.50 फीसदी अनुदान पर दी जाएगी।
बांदा में तिंदवारी,
जसपुरा, बड़ोखर, बबेरू, कमासिन नरैनी, हमीरपुर में गोहांड व मौदहा, महोबा
में कबरई व श्रीनगर और चित्रकूट में मानिकपुर, पहाड़ी व राजापुर ब्लाक
सूखाग्रस्त (डीपीएपी) की श्रेणी में हैं। यहां ज्यादा अनुदान मिलेगा। रेन
गन की एक हेक्टेयर क्षेत्र में कुल लागत 31,600 रुपये है। इसमें किसानों को
70 फीसदी यानी साढ़े सात हजार रुपये जमा करने होंगे।
रेन गन पहले
आओ, पहले पाओ के आधार पर दिए जाएंगे। एक किसान को अधिकतम पांच हेक्टेयर तक
सिंचाई के लिए यह उपकरण मिलेंगे। इसके लिए किसान के खेत में बोरिंग जरूरी
है।
इसका प्रमाण पत्र भी देना होगा। अंशदान जमा करने के बाद रेन गन की लागत का पूरा पैसा कंपनी के खाते में जमा किया जाएगा।
-मनोहर सिंह, उप निदेशक, उद्यान, चित्रकूटधाम मंडल।