बांदा। शासन के फरमान पर नवनिर्मित मेडिकल कालेज में
इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) आनन-फानन अधूरी तैयारियों के बीच चालू
कर दिया गया। मरीज भी भर्ती किए जाने लगे हैं।
जुगाड़ का आलम यह है
कि 150 बेड के स्थान पर सिर्फ 50 बेड ही आए हैं, वह भी पुराने हैं। इन्हें
झांसी मेडिकल कालेज से यहां भेजा गया है। अन्य बेड भी प्रदेश के अन्य
मेडिकल कालेजों से मांगे जा रहे हैं।
मेडिकल कालेज में ओपीडी मार्च
में ही शुरू हो चुकी है। गिने-चुने डाक्टर रोजाना लगभग दो सौ मरीजों को देख
रहे हैं। 12 मार्च को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेडिकल कालेज का औपचारिक
उद्घाटन किया था। तब उन्होंने छह माह के अंदर 300 बेड का अस्पताल शुरू
करने का निर्देश दिया था।
यह समय सीमा बीत चुकी है। फिलहाल मेडिकल
कालेज में 50 बेड डालकर आईपीडी शुरू कर दी गई है। हालांकि बेड मरम्मत किए
हुए पुराने नजर आ रहे हैं। 100 बेड गोरखपुर मेडिकल कालेज और 75-75 बेड
कानपुर, इलाहाबाद और लखनऊ मेडिकल से मंगाए जा रहे हैं, ताकि 300 बेड का
जुगाड़ हो सके।
प्रदेश सरकार ने 23 अक्तूबर के पहले आईपीडी शुरू
करने का आदेश दिया है। इस पर आनन-फानन में आधी-अधूरी तैयारियों के बीच
आईपीडी शुरू हो गई है। 10-10 बेडों के तीन वार्ड बना दिए गए हैं। इनमें
मरीज भी भर्ती होने लगे हैं। अब तक छह मरीज भर्ती हो चुके हैं।
ईएनटी
सर्जन और कैंसर विशेषज्ञ डा.भूपेंद्र सिंह ने शनिवार को एक मरीज का आपरेशन
भी किया। उधर, प्रमुख सचिव के इसी हफ्ते आने की खबर मिलने पर मेडिकल कालेज
में तैयारियां और तेज हो गई हैं। 300 बेड वाले अस्पताल में दीवारों और
फर्श आदि में हुई टूट-फूट की मरम्मत की जा रही है।
दिसंबर में
मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की टीम मेडिकल कालेज का निरीक्षण करने आ
सकती है। इसके मद्देनजर मेडिकल कालेज की तमाम खामियां दूर की जा रही हैं।
प्रधानाचार्य डा.आरपी सिंह ने बताया कि 23 अक्तूबर तक डेढ़ सौ बेड का
अस्पताल शुरू हो जाएगा।
नवंबर में बेडों की संख्या बढ़कर 300 हो
जाएगी। 50 कुर्सियां कानपुर से आईं हैं। अन्य मेडिकल कालेजों से भी
कुर्सियां मंगाई जा रही हैं। 25 वेंटीलेटर गोरखपुर मेडिकल कालेज से आ रहे
हैं।
मेडिकल कालेज में आकस्मिक चिकित्साधिकारी (ईएमओ) की नियुक्ति
की भी प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रधानाचार्य ने बताया कि इस पद पर तैनाती
के लिए यहां से चार नाम भेजे गए हैं। इनमें डा. हरनाथ सिंह, डा. संतराम
वर्मा, डा. शशिकांत वर्मा और डा. जगदीश सिंह शामिल हैं।
मेडिकल
कालेज के अस्पताल की क्षमता 500 बेड की है। अगले सत्र से यहां एमबीबीएस
कक्षाएं शुरू होनी हैं। शासन की ओर से इसका दबाव है। हालांकि अभी पैरा
मेडिकल स्टाफ की तैनाती बाकी है। प्राचार्य ने बताया कि आक्सीजन, ब्लड
प्रेशर इत्यादि उपकरण आ गए हैं। ईसीजी, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे मशीन की खरीद
के लिए टेंडर हो चुके हैं। इस माह के अंत तक ये मशीनें भी आने की उम्मीद
है।
चित्रकूटधाम मंडल में डेंगू के मरीज तेजी से बढ़े हैं, लेकिन
मंडल के इकलौते मेडिकल कालेज में डेंगू और एचआईवी की जांच सुविधा अभी नहीं
है। यहां की पैथालाजी में खून की बड़ी जांचें नहीं हो रही हैं। प्राचार्य
ने बताया कि सीबीसी, किडनी, लीवर और शुगर आदि की जांच हो रही है। डेंगू,
एचआईवी, हेपेटाइटिस बी आदि की जांच अगले माह शुरू हो सकती है।