quenching thirst by digging a pit
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नरैनी (बांदा)। प्यास बुझाने के लिए ग्रामीण महिलाओं को पाइपलाइन के नीचे गड्ढा खोदकर पानी निकालना पड़ रहा है। लापरवाही और बदहाली की इससे बड़ी और क्या नजीर होगी। महुआ ब्लॉक पनगरा गांव में दो महीने से पेयजल आपूर्ति न होने से परेशान ग्रामीण महिलाएं पानी के लिए जुगत भिड़ा रहीं हैं।
यहां के अनुसूचित व पिछड़ी जाति की बस्ती में पानी नहीं पहुंच रहा। आठ साल पहले बनी पानी की टंकी भी अब तक शुरू नहीं हो पाई। पनगरा गांव की आबादी लगभग 25 हजार है। पांच पहाड़ों के बीच बसे इस गांव की भौगोलिक स्थित ऊंची-नीची है। आठ साल पहले जल निगम ने कई करोड़ रुपये की लागत से ओवर हेड टैंक और पांच नलकूपों का निर्माण कराया था। पूरे गांव और मजरों गौर-शिवपुर तक पाइपलाइन बिछा कर ग्रामीणों को कनेक्शन दिए थे। ग्रामीणों ने बताया कि संसाधन तो मुहैया करा दिए, लेकिन आपूर्ति आज तक शुरू नहीं की।
महिलाओं को आज भी पाइपलाइन के नीचे गड्ढा खोदकर लीकेज से पानी निकालना पड़ रहा है। प्रतिदिन पानी भरने वाली महिलाओं का जमघट लगता है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान ने प्राइवेट कर्मचारी तैनात कराकर कुछ दिन आपूर्ति कराई थी। अब तीन से चार साल हो गए मोटर फुंकी पड़ी है। कोई सुनने वाला नहीं है। ग्राम प्रधान जगदीश प्रसाद यादव ने बताया कि विभागीय अधिकारियों से कई बार मौखिक रूप से समस्या बताई गई। अब उन्होंने मुख्यमंत्री समेत अधीक्षण अभियंता (भूरागढ़) आदि के पोर्टल पर शिकायत की है।