अधिशासी अभियंता की गाड़ी से उपचार के लिए चपरासी को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे साथी कर्मचारी। संवा
बांदा। साइबर ठगों के नए पैतरे जानलेवा होते जा रहे हैं। अभी दो दिन पहले रिटायर्ड शिक्षक को 10 घंटे डिजिटल अरेट करके 36 लाख रुपये ट्रांसफर कराने का मामला जहन से उतरा नहीं था कि शुक्रवार को ऐसी ही एक और घटना हुई। ठग ने खुद को साइबर सेल अधिकारी बता पीडब्ल्यूडी के चतुर्थ कर्मी को फोन करके खाते से संदिग्ध लेनदेन होने की बात कहकर दहशत में डाल दिया। इससे घबराए कर्मी बेहोश होकर गिरा तो सहकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन उन्हें जिला अस्पताल भर्ती कराया गया।
यह घटना शुक्रवार को जनपद के लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड में शाम करीब चार बजे घटित हुई। जब विभाग में चपरासी के पद पर तैनात 35 वर्षीय जुगनू निवासी खाईंपार शहर कोतवाली के फोन पर एक कॉल आई थी। जिसके बाद वह इतनी दहशत में आ गया कि वह बेहोश होकर गिर पड़ा। लिपिक हरीश अहिरवार ने बताया कि जुगनू को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को साइबर थाने का अधिकारी बताकर धमकाया।
कॉल सुनने के बाद जुगनू इतना घबरा गया कि ऑफिस में ही बेहोश होकर गिर पड़ा। जिसके बाद वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत अधिशासी अभियंता को सूचना दी। उन्होंने अपनी गाड़ी से जुगनू को जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उसे गंभीर हालत में भर्ती किया और इलाज शुरू किया। करीब तीन घंटे बाद जब जुगनू को होश आया तो उसने परिजनों व स्टाफ के लोगों को पूरी घटना बताई। डॉक्टरों ने बताया कि जुगनू को डर और मानसिक तनाव के कारण अटैक आया है।
विभागीय कर्मचारियों में इस घटना को लेकर दहशत और आक्रोश दोनों दिखा। अधिशासी अभियंता मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि यह साइबर ठगों का नया तरीका है, जो सरकारी कर्मचारियों तक को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की कि किसी भी अज्ञात कॉल या लिंक पर विश्वास न करें और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
वहीं सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक ने कहा कि कोई शिकायत तो नहीं मिली है, फिर भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।