फोटो-9- पर्व में जिनवाणी की आरती करते श्रद्धालु। स्रोत- जैन समाज।
बांदा। पर्युषण पर्व के चौथे दिन जैन समाज ने उत्तम शौच धर्म की आराधना की। छोटी बाजार स्थित जैन चैत्यालय में बाल ब्रह्मचारी नन्हें भैया ने अपने प्रवचनों में उत्तम शौच धर्म का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि शौच का अर्थ केवल शरीर की स्वच्छता नहीं बल्कि मन को लोभ, राग-द्वेष और विषय-कषायों से मुक्त करना है।
उन्होंने बताया कि मनुष्य बाहरी शुद्धता के लिए स्नान करता है, तीर्थों और पवित्र स्थानों पर जाता है, मंदिरों में पूजा-अर्चना करता है, लेकिन केवल इन क्रियाओं से आत्मा की शुद्धि नहीं होती। आत्मा की वास्तविक शुद्धि अपने भीतर के विकारों को दूर करने से होती है।
उन्होंने प्रवचन में बताया कि यदि मन में लोभ, क्रोध, मान, माया, राग-द्वेष और अहंकार मौजूद हैं तो वास्तविक शौच धर्म नहीं कहा जा सकता। प्रवचनों के उपरांत भक्तों ने जिनवाणी की आरती की।