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जनता कर्फ्यू को मिला जनता का भरपूर समर्थन

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बाबूलाल गुप्त। - फोटो : BANDA
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बांदा में सड़कें सूनी, लोग घरों में कैद
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बांदा। सड़कों पर सन्नाटे ने नया इतिहास रच दिया। ऐसी वीरानी हिंसा या दंगे में पुलिस के लगाए कर्फ्यू में भी नजर नहीं आती। प्रधानमंत्री की अपील और कोरोना का खौफ लोगों के सिर चढ़कर बोला। जाति-धर्म, अमीर-गरीब, महिला-पुरुष, जवान-बूढ़े का फर्क मिट गया। सबके सब घरों में कैद रहे। 70 और 80 की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों का कहना था कि उनके जीवन का यह सबसे बड़ा सन्नाटा था। बांदा में कभी कर्फ्यू नहीं लगा।
कोरोना वायरस से बचाव के लिए देशव्यापी कवायदों में प्रधानमंत्री के आह्वान पर जनता कर्फ्यू मुख्यालय से लेकर कस्बों तक अपनी छाप छोड़ गया। लोग स्वेच्छा से कारोबार, नौकरी-चाकरी त्यागे घरों में कैद रहे। प्रशासन और पुलिस के जत्थे और उनके वाहनों के बज रहे हूटर सन्नाटा तोड़ते रहे। इक्का-दुक्का सड़कों पर नजर आने वालों को पुलिस ने रोका-टोका।
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जनता कर्फ्यू में दवाओं और जरूरी सेवाओं को अलग रखा गया था, लेकिन मेडिकल स्टोर भी नहीं खुले। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरिजाघर, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे भी सुनसान रहे। भूले-भटके महानगरों या अन्य स्थानों से देर रात ट्रेन-बसों से लौटे यात्रियों को अपने गांव-घर जाने के लाले पड़ गए। उन्हें कोई वाहन नहीं मिला। तमाम यात्री भटकते या इधर-उधर शरण लेते देखे गए। प्रशासन और पुलिस के अफसरों ने जिला और तहसील मुख्यालयों आदि में भ्रमण किया।

शहर में बालकनी में थाली-शंख बजाते लोग।- फोटो : BANDA

सूनी पड़ी तिंदवारी पीएचसी।- फोटो : BANDA

खत्री पहाड़ में विंध्यवासिनी देवी मंदिर का बंद गेट।- फोटो : BANDA

बांदा में बंद दुकानें, सड़क पर सन्नाटा।- फोटो : BANDA

बांदा रोडवेज में खड़ी बसें।- फोटो : BANDA

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