बांदा। लॉकडाउन में बंद निजी और सरकारी स्कूल-कालेजों द्वारा फीस वसूली पर अब न्यायपीठ बाल कल्याण समिति ने भी कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015 से प्राप्त शक्तियों का हवाला देकर कहा है कि किसी भी छात्र या अभिभावक से जबरन फीस वसूली का प्रयास किया गया या दबाव बनाया गया तो इसे छात्र के प्रति क्रूरता माना जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समिति अध्यक्ष रामकुमार सिंह और सदस्य नवीन कुमार त्रिपाठी के संयुक्त हस्ताक्षरों से डीआईओएस और बीएसए को जारी पत्र में कहा है कि कोविड-19 की अवधि में जबरन शुल्क न वसूलने का शासन ने भी निर्देश जारी किया है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत अब समिति यह निर्देश जारी कर रही है।
सभी विद्यालय यह भी सुनिश्चित करें कि आनलाइन शिक्षा में बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखते हुए मानक के अनुरूप शिक्षा दी जाए। स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के जब्त किए गए मोबाइल फोन उनके माता-पिता को वापस किए जाएं ताकि वे आनलाइन शिक्षा में शामिल हो सकें।
समिति ने यह भी निर्देश दिया कि शुल्क भुगतान न होने पर किसी छात्र-छात्रा का नाम स्कूल न काटा जाए, न ही शैक्षिक गतिविधियों में शामिल होने से रोका जाए। समिति ने डीआईओएस व बीएसए को निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी सरकारी व निजी स्कूलों को पत्र जारी कर यह निर्देश लागू करें।