बांदा। किसानों के लिए बीमा कंपनियां घाटे का सौदा साबित हो रही है। मुआवजा देने में मनमानी व देरी के कारण साल दर साल कृषकों का भरोसा बीमा कंपनियों पर कम होता जा रहा है। वर्ष 2024-25 में बीमा कंपनियों ने प्रीमियम 17 करोड़ वसूला और मुआवजा सात करोड़ दिया।
खरीफ वर्ष 2025-26 में फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। अभी तक 81 हजार किसानों ने ही बीमा कराया है। सरकार की मंशा है कि बारिश कम या ज्यादा होने और मौसम की विपरीत परिस्थितियों के मद्देनजर किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा कराएं। इसमें किसानों को महज दो फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है शेष केंद्र व राज्य सरकार देती है। इसके बावजूद साल दर साल किसानों का बीमा कंपनियों से मोह कम होता जा रहा है। इसकी मुख्य वजह नुकसान के आंकलन में बीमा कंपनियों की मनमानी दूसरा क्षतिपूर्ति देने में अनावश्यक देरी है।
खरीफ वर्ष 2024-25 में जिले के 1,10,031 किसानों ने फसल बीमा कराया। इसमें 1,05,731 ऋणी व 4300 गैर ऋणी किसान शामिल थे। बीमा कंपनी ने केंद्र व प्रदेश सरकार सहित किसानों से प्रीमियम के रूप में 17,90,67,796 रुपए वसूल किए। सितंबर में आई केन व यमुना नदी की बाढ़ व अति बारिश से किसानों को खासा नुकसान हुआ। मूंग, उड़द, अरहर और तिल की फसल सड़ गई।
बीमा कंपनी के समक्ष 45 हजार किसानों ने क्लेम दावा किया। बीमा कंपनी ने महज 22510 किसानों को 7,37,67,059 रुपए का क्लेम दिया। शेष दावे यह कहकर खारिज कर दिए कि नुकसान आंशिक है। इस वर्ष खरीफ फसल के बीमा के लिए प्रशासन जमकर प्रचार प्रसार करने में लगा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान बीमा कराएं, फिर भी किसान बीमा नहीं करा रहे हैं। अभी तक महज 81 हजार 532 ऋणी व गैर ऋणी किसानों ने ही बीमा कराया है।