पांटून पुल बनने के बाद रविवार को शाम पुल से गुजरता ट्रक।
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यमुना नदी पर हर साल दिवाली के फौरन बाद पांटून पुल बनाने वाले पीडब्ल्यूडी ने अबकी चुप्पी साध ली थी। पुल न बनने से क्षेत्रीय गांवों के लोग समेत कई जनपदों के यात्री परेशान थे। 40 रुपये किराया देकर नाव से नदी पार कर रहे थे। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही और यात्रियों की पीड़ा की ‘अमर उजाला’ में छपी खबर रंग लाई। आनन-फानन पीपे का पुल तैयार कर दिया गया। रविवार को शाम यह चालू हो गया।
यमुना नदी में औगासी घाट पर पक्का पुल कई वर्षों से निर्माणाधीन है। यह अधूरा पड़ा है। पांटून पुल से ही फतेहपुर, कानपुर, लखनऊ, चित्रकूट आदि जाने का नजदीकी रास्ता है। बारिश में हर वर्ष पीडब्ल्यूडी पांटून पुल हटा देती है।
अक्तूबर में बारिश खत्म होने के बाद इसे फिर बना दिया जाता है। लेकिन इस वर्ष पीडब्ल्यूडी ने चुप्पी साध ली। कई जनपदों के राहगीरों को नदी पार करने में भारी असुविधा होने के साथ ही आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ रहा था। शनिवार को अमर उजाला ने यह खबर चित्र समेत प्रमुखता से प्रकाशित की। उसी दिन युद्ध स्तर पर पांटून पुल बनाने का काम शुरू हो गया। रविवार को शाम यह बनकर तैयार हो गया और आवागमन भी शुरू हो गया। पुल ठेकेदार बच्चा सिंह ने यह भी खुशखबरी दी कि यात्रियों या वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। पूर्व मंत्री शिवशंकर पटेल ने कहा कि बिना पुल यात्रियों को भारी असुविधा हो रही थी।