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दस्यु प्रभावित बदौसा में स्वास्थ्य सेवाएं फ्लाप

Sun, 19 Apr 2015 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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वारदात सन् 2001 की है। उस समय मौदहा हमीरपुर निवासी डॉक्टर दयाशंकर गुप्ता फतेहगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी थे। ठठिया गैंग ने दिनदहाड़े उनका अस्पताल से अपहरण कर लिया। 17 दिन बाद पांच लाख की फिरौती वसूलकर डकैतों ने उन्हें छोड़ा था। इस वारदात के बाद डॉक्टर लामबंद हो गए थे। धरना-प्रदर्शन, हड़ताल के बीच डॉक्टरों ने दस्युओं के खौफ से इलाकों में ड्यूटी करने से इन्कार कर दिया था। उसके बाद से फतेहगंज के स्वास्थ्य केंद्र में किसी भी डॉक्टर ने ड्यूटी ज्वाइन नहीं।
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फतेहगंज की घटना के बाद दस्यु प्रभावित क्षेत्र बदौसा में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्गति है। डकैतों का ऐसा हौव्वा खड़ा है कि कल्याणकारी योजनाएं दम तोड़ रही हैं। डॉक्टरों के ड्यूटी न ज्वाइन करने से करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पताल भवन वीरान पड़े हैं। ज्यादातर पर ताले लटके हैं। हालात ऐसे हैं कि इस क्षेत्र के मरीजों को काफी दूर दुर्गम रास्तों का सफर तय करके कस्बों में इलाज कराना पड़ रहा है।

शिफ्ट नहीं हुआ होम्योपैथिक अस्पताल
जबरापुर लोहिया गांव दस्यु प्रभावित क्षेत्र में आता है। ग्रामीणों को होम्योपैथिक चिकित्सा मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यहां वर्ष 2004 में होम्योपैथिक चिकित्सालय बनवाया था। आज तक इस भवन में अस्पताल शिफ्ट नहीं हुआ। बताया जाता है कि जहां पर यह भवन बनाया गया है, वह इलाका गांव से काफी हटकर है।
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जगह सुनसान होने के कारण अस्पताल स्टाफ ड्यूटी करने से इन्कार कर रहा है। डॉक्टर ने तो यहां तक कह दिया कि गांव के लोग ही नई बिल्डिंग पर जाने से इन्कार कर रहे हैं। मरीज नहीं आएंगे तो हम क्या करेंगे। गांव के मोतीलाल, जयपाल, राजू आदि ने बताया कि एक पुराने जर्जर कमरे में अस्पताल चल रहा है। अब तो नए भवन के खिड़की, दरवाजे भी चोरी हो गए हैं। डकैतों के भय के कारण कोई नए भवन पर जाने को तैयार नहीं है।

मातृ शिशु कल्याण केंद्रों पर जड़े हैं ताले
जबरापुर, बघेलाबारी, कल्याणपुर और तरसूमा गांव दस्यु प्रभावित इलाकों में आते हैं। यहां वर्ष 2008-09 में मातृ शिशु कल्याण केंद्र बनाए गए थे। प्रत्येक केंद्र के बनने में 7 लाख रुपये खर्च हुए थे। तब से लेकर आज तक सभी केंद्रों पर ताले पड़े हैं।

दुबरिया गांव में वर्ष 2009-10 में बनाया गया केंद्र आज तक गुलजार नहीं हुआ। कहा जाता है कि कार्यदाई संस्था ने संबंधित विभाग को हैंडओवर नहीं किया है, लेकिन इस केंद्र के न खुलने का कारण भी दस्युओं का खौफ माना जा रहा है। स्टाफ गांव से दूर सुनसान में ड्यूटी करने को तैयार नहीं है।

तेरा (ब) गांव में भी वर्ष 2009-10 से केंद्र में ताला पड़ा है। भवनों के खिड़की, दरवाजे चोरी हो गए है। फतेहगंज में वर्ष 2004 में 14 लाख रुपये की लागत से बने पशु चिकित्सालय पर ताला बंद रहता है। डॉक्टर और कर्मचारी यहां आते ही नहीं।

‘फतेहगंज क्षेत्र में मातृ शिशु कल्याण केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मचारियों के आवास नहीं हैं। आवास बनते ही केंद्र शुरू हो जाएंगे। कुछ माह पहले शिकायत आई थी कि कुछ डॉक्टरों को दस्यु दल से धमकी मिली है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। स्वास्थ्य और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ क्षेत्र के बाशिंदों को मिलेगा।’
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- कैप्टन डॉ.आरके सिंह, सीएमओ, बांदा
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