बांदा। सूखे का कहर हैंडपंपों पर भी टूटा है। जिले के 29,028 हैंडपंपों में 1882 खराब हैं। 1200 हैंडपंपों का रिबोर होना है। इन्हें दुरुस्त करने के लिए जल निगम को करीब 17.29 करोड़ रुपये की दरकार है, लेकिन शासन से अभी तक पैसा नहीं आया है। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी का संकट भी गहराता जा रहा है। लोग दूरदराज से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं।
बिसंडा ब्लाक में 3272 में 212 हैंडपंप खराब हैं और 160 का रिबोर होना है। बड़ोखर ब्लाक में 3429 हैंडपंपों में 205 खराब हैं, 150 रिबोर योग्य हैं। जसपुरा ब्लाक में 2262 में 125 खराब हैं और 165 का रिबोर होना है।
बबेरू में 4298 में 249 खराब और 150 रिबोर के लिए हैं। कमासिन में 3812 हैंडपंपों में 232 खराब हैं और 165 में रिबोर होना है। तिंदवारी ब्लाक में 3841 में 216 खराब व 120 रिबोर योग्य हैं। महुआ में 4031 हैंडपंपों में 201 खराब हैं और 140 में रिबोर होना है। ऐसे ही नरैनी ब्लाक में 4083 हैंडपंपों में 232 में मरम्मत की जरूरत है और 150 हैंडपंप रिबोर बिना ठप हैं।
एक रिबोर में करीब 55 हजार रुपये का खर्च आता है। जल निगम अधिकारियों के मुताबिक हैंडपंपों की मरम्मत के लिए विभाग में कोई बजट नहीं है। बुंदेलखंड में पांच जिलों के लिए इसी माह 3500 हैंडपंपों की मरम्मत का पैसा आना था, लेकिन अभी तक नहीं आया।
17.29 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई है, ताकि हैंडपंपों की मरम्मत या रिबोर कराया जाए। सामान्य दिनों में 100 से 120 फीट गहराई में बोरिंग से पीने का साफ पानी मिलता था, लेकिन सूखे के हालात में जलस्तर गिरने से 140 से 160 या 200 फीट तक पानी नीचे चला गया है। ऐसे में ज्यादातर हैंडपंपों में पाइप डालने की जरूरत है। अभी गर्मी के शुरुआती दौर में ही पेयजल की ऐसी स्थिति है तो मई व जून में तो लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए जूझना होगा।
सूखे की वजह से इस साल रिबोर वाले हैंडपंपों की संख्या में काफी इजाफा हुआ। खराब हैंडपंपों को चिह्नित कर सूची बना ली गई है। शासन से बजट आते ही इनकी रिबोरिंग शुरू करा दी जाएगी। फिलहाल अभी तक हैंडपंपों के सुधार और रिबोर के लिए पैसा नहीं है। जहां पेयजल की स्थिति ज्यादा खराब है, वहां जनहित में जैसे-तैसे रिबोर कराना पड़ रहा है।
-पीके स्वामी, अधिशाषी अभियंता, जल निगम 16वीं शाखा, बांदा।