‘प्वाइंट आफ सेल’ मशीन कोटेदारों के भ्रष्टाचार पर रोक लगाएगी। मंडल मुख्यालय समेत नगरीय क्षेत्र की 81 सस्ती दर दुकानों में ये जल्द लगने जा रहीं। ट्रायल के लिए 6 मशीनें पिछले सप्ताह आई थीं। मटौंध की दो और बबेरू में तीन दुकानों में इनका प्रयोग किया जा रहा है। अगले माह से ये नगर क्षेत्र की सभी दुकानों में लग जाएंगी। आपूर्ति विभाग ने शासन को डिमांड भेजी है। पॉस मशीन में राशन की मात्रा, रेट और कार्डधारक की श्रेणी आदि की जानकारी उच्चाधिकारियों को भी मिलेगी। फुटकर के नाम पर भी कोटेदार खेल नहीं कर सकेंगे।
रोडवेज बस में कंडेक्टरों के पास पॉस मशीने हैं। इसी तर्ज पर कोटेदार भी पॉस मशीनों से लैस किए जा रहे हैं। पहले चरण में ट्रायल के तौर पर मटौंध और बबेरू में इस माह से इनका प्रयोग किया जा रहा है। वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए अब बांदा शहर की 51, अतर्रा की 12, मटौंध में 2, तिंदवारी में 3, नरैनी में 4, ओरन में 2 और बबेरू में 3 दुकानों में भी पॉस मशीनें जल्द लगेंगी। पॉस मशीनों से दो फायदे होंगे। एक कैशलेस ट्रांजेक्शन यानी मोबाइल बैंकिंग के जरिए वित्तीय लेनदेन होगा।
दूसरे राशन का जितना वास्तविक निर्धारित मूल्य होगा कार्डधारकों को वही देना होगा। डिजिटलाजेशन से जुड़ने के बाद कोटेदार जैसे ही राशन कार्डधारक का नाम, राशन की मात्रा और एमाउंट डालेंगे, मशीन से तत्काल पर्ची निकलेगी। इसमें लिखे रेट के आधार पर कार्डधारक भुगतान करेगा। उसके लिए दोनों सुविधाएं रहेंगी। वह चाहे तो मोबाइल बैकिंग के जरिए पैसे दे सकता है और चाहे तो नकद कैश दे सकते हैं। अभी तक फुटकर के नाम पर कार्ड धारकों को 5 से 10 रुपये का घाटा होता था।
लेकिन पॉस मशीन यह करप्सन भी रोकेगी। फिलहाल आपूर्ति विभाग ने शासन को शहर में संचालित कोटे की 81 दुकानों में पॉस मशीन लगाने के लिए शासन को डिमांड भेजी है। जिला पूर्ति अधिकारी निर्मलेंदु कुमार ने बताया कि अभी शासन से आईं 6 पॉस मशीनों के जरिए राशन वितरण कराया जा रहा है। अगले माह डिमांड की गई मशीनें भी आ जाएंगी। इन्हें शहर की दुकानों में प्राथमिकता के आधार पर लगवाया जाएगा।