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जख्म पे जख्म लगे फिर भी न भूला सजदा...

Tue, 10 Nov 2015 11:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। मोहर्रम माह में शहीदाने कर्बला की याद में जलसे और मुशायरों का सिलसिला जारी है। सोमवार की रात सेढू तलैया स्थित मदरसा मखदूमे रब्बानी में तरही मुशायरे में शायरों ने कर्बला और शोहदा को खिराजे अकीदत पेश की।
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सैय्यद असर रब्बानी की नात से शुरुआत हुई। सईद वारसी ने शेर पढ़ा- जख्म पे जख्म लगे फिर भी न भूला सजदा, मेरे शब्बीर का कितना है ये आला सजदा। मुशायरे का संचालन कर रहे इलाहाबाद से आए शायर जीशान ने शेर कहा- बोसा गाहे शहे कौनैन तेरे सामने है, ले ले पेशानिए शब्बीर का बोसा सजदा।

मास्टर नवाब असर का शेर था- इब्ने हैदर का जमाने है छाया सजदा, हूरो गिल्मा ने भी आंखों से लगाया सजदा। महोबा से आए बुुजुर्ग शायर कामिल ने कलाम पढ़ा- वो एक सजदा जो कौनैन के सजदों पे था भारी, उसी को आज तक हम सजदए शब्बीर कहते हैं। दर्द बांदवी ने पढ़ा- तीन खींचा गया और दर्द का एहसास नहीं, भूल सकती नहीं दुनिया वो अली का सजदा। शायर नजरे आलम ने सुनाया- इक तरफ सारे जमाने की इबादत रख दो, इक तरफ करबोबला का वो अकेला सजदा।
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मुशायरे में शरीफ बांदवी, सैय्यद गौहर रब्बानी, सरवर रब्बानी, निश्तर बांदवी ने भी शेर पढ़े। मुशायरे मेें हसन सिद्दीकी, मेराज मसूदी, अकील मियां, आबिद मियां, वाजिद रब्बानी, महमूद,  नइयर रब्बानी आदि शामिल रहे।
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