बांदा। केदार स्मृति संस्था द्वारा प्रकाशित पत्रिका
माटी के विमोचन की रस्म अदा की गई। साहित्यकारों ने कहा कि यह पत्रिका
हिंदी साहित्य को नया जीवन देगी। साहित्यिक पत्रिकाओं को जीवन रेखा बताया
गया।
रविवार को शाम केदार शोध संस्था के तत्वाधान में विमोचन समारोह
आयोजित हुआ। संस्था संरक्षक डॉ. शबाना रफीक ने अपने आवास पर आयोजित समारोह
में कहा कि यह पत्रिका मिटते हुए हिंदी साहित्य को नया जीवन देगी।
इसमें
नए रचनाकारों को भी स्थान मिला है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई की कविता
भी सुनाई। वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने कविता पाठ किया।
महिला डिग्री कालेज के प्रो. शशिभूषण ने कहा कि बांदा में पत्रिकाओं का
स्थान रहा है।
हालांकि उनकी निरंतरता कुछ वर्ष तक ही रही है। डा.
रामगोपाल गुप्ता ने साहित्य पत्रिकाओं को जीवन की रेखा बताया। पूर्व
प्रधानाचार्य बाबूलाल गुप्त ने गुटबंदी को साहित्य का दुश्मन बताते हुए कहा
कि माटी पत्रिका के जरिये इसे खत्म करने का प्रयास होगा।
महिला
डिग्री कालेज की प्रवक्ता और शायर व कवि डा. सबीहा रहमानी ने युवा
रचनाकारों को लेखन से जोड़ने और स्कूल-कालेजों में कविता, कहानी,
प्रतियोगिताएं आयोजित करने पर जोर दिया।
महिला डिग्री कालेज उर्दू
विभागाध्यक्ष डा. दाऊद अहमद सहित डा. चंदसोरिया, अशोक त्रिपाठी जीतू,
विद्यानंद शुक्ल, संत कुमार गुप्त शामिल रहे। डा. रामचंद्र सरस ने सभी का
आभार जताया। संचालन वरिष्ठ कवि नरेंद्र पुंडरीक ने किया।