फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्लीज! मान्यता दे दीजिए, कमियां दूर कर लेंगे

Mon, 04 Apr 2016 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
विज्ञापन
मेडिकल कालेज में निरीक्षण करती एमसीआई टीम। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बांदा। मेडिकल कालेज को मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की मान्यता दिलाने के लिए कालेज प्रशासन और प्रदेश के शिक्षा चिकित्सा विभाग ने पूरी ताकत लगा दी है। सोमवार को एमसीआई टीम ने दोबारा आकर मेडिकल कालेज का सघन निरीक्षण किया।
विज्ञापन


कई घंटे की छानबीन में टीम को कई खामियां मिलीं। निरीक्षण में मौजूद प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक और कालेज प्राचार्य ने टीम को भरोसा दिलाया कि वे कमियां दूर कर देेंगे। प्लीज! मान्यता दे दीजिए।

सोमवार को सुबह आठ बजे ही एमसीआई टीम मेडिकल कालेज पहुंच गई। टीम में डॉ. एमपी परचंद (महाराष्ट्र), डॉ. प्रकाश मैथी (पश्चिम बंगाल) और डॉ. मिलाप शर्मा (हिमाचल प्रदेश) शामिल थे। ओपीडी, आईपीडी, वार्ड, आपरेशन थियेटर, डाक्टर रूम, क्लास रूम, पैथालाजी, ट्रामा सेंटर आदि का बारीकी से मुआयना किया।
विज्ञापन


दवाओं का स्टाक और अभिलेख देखे। काफी व्यवस्थाएं मानक के मुताबिक मिलीं, फिर भी कई खामियां टीम की नजरों से बच नहीं पाईं। हालांकि मेडिकल कालेज प्रशासन ने भरपूर इंतजाम किए थे।

स्थायी और संविदा सहित निजी क्षेत्र के प्राइवेट डाक्टरों की बड़ी जमात उपस्थित थी। महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी और प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार आर्य तथा रिटर्नी प्रो. डॉ. नरेश यादव और डॉ. आरसी अरुण पूरे समय साथ रहे। महानिदेशक और प्राचार्य ने टीम को भरोसा दिलाया कि जो कमियां बताई हैं, उन्हें जल्द दूर कर दिया जाएगा। टीम से अनुरोध किया कि मान्यता की संस्तुति कर दें, ताकि इसी वर्ष 100 सीटों से एमबीबीएस कक्षाएं शुरू हो जाएं।

40 बाहरी डाक्टरों के अभिलेख देखे
बांदा। एससीआई टीम के दौरे ने मेडिकल कालेज का नजारा ही बदल लिया। इलाहाबाद, कानपुर, झांसी, लखनऊ, गोरखपुर, बनारस, मेरठ आदि के मेडिकल कालेजों के 40 महिला-पुरुष डाक्टर यहां मौजूद थे। टीम ने अलग-अलग विभागवार उनके अभिलेख देखे और सवाल-जवाब किए। बांदा के कई निजी वरिष्ठ महिला-पुरुष डाक्टर भी मौजूद रहे।

मरीजों को मुफ्त बांटे लंच पैकेट
बांदा। एमसीआई टीम के निरीक्षण से मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों की चांदी रही। रोजाना भले ही उन्हें पानी भी न मयस्सर होता हो पर आज बेड पर ही लंच पैकेज दिए गए। इसके एवज में मरीजों से कोई पैसा नहीं लिया गया।

स्टाफ कर्मचारियों को भी लंच पैकेट बांटे गए। इसकी व्यवस्था मेडिकल कालेज कर्मियों की नियुक्ति का ठेके लिए ठेकेदार ने की थी। मरीजों की संख्या भी रोजमर्रा से ज्यादा लगभग 956 रही। 300 बेड ज्यादातर मरीजों से भरे नजर आए। दूसरी तरफ डाक्टरों के टीम के पीछे-पीछे घूमते रहने से सैकड़ों मरीजों को घंटों बैठकर इंतजार भी करना पड़ा। कुछ वापस लौट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें