ज्ञापन देने आए बांदा पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के प्रतिनिधि।
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मंडल मुख्यालय में स्थित पेट्रोल पंपों को बांदा विकास प्राधिकरण द्वारा नोटिस जारी किए जाने से पंप संचालक भड़क उठे हैं। नोटिस को गैर कानूनी और मनमानी बताते हुए उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करके कंपाउंडिंग करने का आरोप लगाया है। चेतावनी दी है कि नोटिसें वापस नहीं ली गईं तो प्राधिकरण के विरोध में पूरे जिले के पेट्रोलपंप बंद कर दिए जाएंगे।
शुक्रवार को यहां बांदा पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन द्वारा मंडलायुक्त को दिए ज्ञापन में कहा गया है कि पेट्रोल पंप के लिए एनओसी जारी होते समय डीएम को सभी अभिलेख प्रेषित किए जाते हैं। उसी के बाद एनओसी मिलती है। पेट्रोल पंप का निर्माण कंपनी की देखरेख में होता है। डीलर यहां कोई अतिरिक्त निर्माण नहीं करता। ऐसे में डीलर को नोटिस भेजना गैरकानूनी है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि विधवा पेट्रोल पंप संचालिका मंजुला शुक्ला को नोटिस भेजकर प्राधिकरण ने धौंस-धमकी देकर 14 लाख रुपये जबरन जमा करा लिए। इसके तनाव और सदमे में वह बीमार पड़ गई है।
एसोसिएशन जिलाध्यक्ष कुंवर प्रभाकर सिंह चंदेल ने बताया कि बांदा मुख्य शहर के बाहर स्थित 6 पेट्रोल पंपों को नोटिस दी गई है। एनओसी के समय कंपनी पेट्रोल पंप का नक्शा भी देती है। स्वीकृति में वह भी शामिल है। एक अन्य पेट्रोल पंप से भी तीन लाख रुपये जबरन जमा करा लिए गए हैं। ज्ञापन में डीलरों ने कहा है कि विकास प्राधिकरण जनता के साथ डीलरो की भी कंपाउंडिंग कर रहा है। यह हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।
शहर व आसपास तमाम प्रतिष्ठान, इंस्टीट्यूट और सरकारी भवन बगैर मानचित्र के बने हुए हैं। उन पर प्राधिकरण चुप्पी साधे हुए है। डीलर एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि प्राधिकरण ने नोटिस वापस न ली तो पूरे जिले के पेट्रोलपंप बंद कर दिए जाएंगे। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष सहित संरक्षक संतोष ढंढारिया, शरद गुप्ता, संजय गुप्ता आदि शामिल रहे।
बिना नक्शे के हैं सभी पेट्रोलपंप
बांदा। पेट्रोल पंपों को नोटिस जारी करने के मामले में बांदा विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता हीरालाल यादव का कहना है कि बांदा में लगभग सभी पेट्रोल पंप बिना नक्शा के बने हैं। न बिल्डिंग का नक्शा पास कराया गया है और न पेट्रोल पंप का। नोटिस देकर पेट्रोल पंप संचालकों से केहा गया है कि नक्शा बनवाकर निर्धारित शुल्क जमा करके स्वीकृत कराएं। वरना कार्रवाई की जाएगी।