नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को आदेश दिया है कि दोनों राज्यों में अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाएं। इससे संबंधित चल रही जांच पड़ताल को दो माह के अंदर निस्तारित करने के भी आदेश दिए हैं। इसी अंतिम आदेश के साथ एनजीटी ने पिछले पांच वर्षों से याचिकाओं पर चल रही सुनवाई निस्तारित कर दी।
बांदा के समाजसेवी उदयपुर गांव निवासी ब्रजमोहन यादव सहित कई लोगों ने एनजीटी में अवैध खनन के विरुद्ध याचिकाएं दाखिल की थीं।
ब्रजमोहन ने अक्तूबर 2013 में बांदा की केन और बागै नदियों में हो रहे अंधाधुंध अवैध खनन और पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान का हवाला देकर रिट याचिका दायर की थी। एनजीटी इस रिट याचिका पर तभी से लगातार सुनवाई कर रही थी। बीच-बीच में एनजीटी ने सख्त रुख अपनाकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों सहित अवैध खनन से जुड़े 710 लोगों को नोटिसें जारी की थीं। कई पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया था। केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार सहित लगभग तीन दर्जन लोगों को नोटिसें देकर अवैध खनन के बारे में स्पष्टीकरण भी मांगा था।
जांच के लिए एनजीटी ने लोकल कमिश्नर के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अग्नेश सेन को बांदा पड़ताल के लिए भी भेजा था। उन्होंने खदानों का स्थलीय जांच पड़ताल की थी और तमाम फोटोग्राफ भी मौके से लिए थे। पांच वर्षों तक चली लंबी सुनवाई के बाद एनजीटी ने 24 जुलाई को अपना अंतिम आदेश जारी करते हुए यह सभी याचिकाएं निस्तारित कर दीं। इस बाबत एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायाधीश न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एसपी वांगड़ी और विशेषज्ञ सदस्य डाक्टर नागिन नंदा द्वारा दिए गए आदेश में कहा गया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वकील ने कहा कि वर्तमान में प्रश्नगत क्षेत्र में कोई अवैध खनन नहीं हो रहा। न ही स्वीकृति दी गई है। एनजीटी ने आदेश दिया कि यूपी और एमपी सरकार आज की तारीख से दो माह के भीतर चल रही जांचों को निस्तारित करें।
13 लाख घन फीट अवैध खनन बताया था लोकल कमिश्नर ने
एनजीटी द्वारा केन और बागै नदियों में अवैध खनन की जांच को मौके पर भेजे गए अपने लोकल कमिश्नर अग्नेश सेन ने अपनी जांच रिपोर्ट में एनजीटी को अवगत कराया था कि अवैध खनन नदी के साथ पहाड़ों में भी हो रहा है।
अवैध खनन करने वालों ने उनकी जांच में तरह-तरह के अवरोध पैदा किए। लोकल कमिश्नर सेन ने अवैध खनन स्थलों के लगभग 50 फोटोग्राफ भी लिए थे और इन्हें एनजीटी में दाखिल किया था। इन फोटो में जेसीबी और ट्रैक्टर आदि के निशान भी दिखाई दे रहे थे। लोकल कमिश्नर सेन ने 13 लाख घन फीट बालू का अवैध खनन होने की रिपोर्ट दी थी। लोकल कमिश्नर के साथ यहां किए गए बर्ताव पर एनजीटी ने टिप्पणी की थी कि हम बहुत दुखी हैं कि सरकार ने लोकल कमिश्नर की सुरक्षा का पर्याप्त इंतजाम नहीं किया। ब्यूरो
वकील बोले, दो माह में निपटा देंगे मामले
उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने एनजीटी को भरोसा दिलाया कि दो माह के भीतर अवैध खनन के हर्जाने की वसूली के प्रकरणों को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया जाएगा, वहीं मध्य प्रदेश के सरकारी वकील ने भी यही भरोसा दिलाया है। एनजीटी ने यह भी खबरदार किया कि भविष्य में अवैध खनन न होने देने के लिए दोनों राज्य चौकन्ना और सजग रहें। संबंधित अधिकारियों को बताया जाए कि अवैध खनन से वातावरण को नुकसान पहुंचता है। ब्यूरो