फोटो-22-जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मौजूद डीएम व अन्य। स्रोत: प्रशासन
बांदा। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में स्वास्थ्य योजनाओं की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी अमित आसेरी ने नाराजगी जताई। जननी सुरक्षा योजना के तहत लक्ष्य के सापेक्ष संस्थागत प्रसव कम होने और लाभार्थियों का भुगतान लंबित रहने पर संबंधित अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए। सीएचसी-पीएचसी और मेडिकल कॉलेज से मरीजों को रेफर करने के मामलों की भी समीक्षा की गई।
कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में बताया गया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत 36 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 15,679 संस्थागत प्रसव हुए हैं। यह लक्ष्य का करीब 44 प्रतिशत है। इस पर डीएम ने सभी अधीक्षकों और प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को आशाओं के सहयोग से शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव अस्पतालों में कराने के निर्देश दिए।
पिछले माह सीएचसी और पीएचसी से करीब 650 मरीजों को जिला अस्पताल या रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।मेडिकल कॉलेज से पिछले माह 204 मरीजों को दूसरे उच्च केंद्रों पर रेफर किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि जिन मरीजों का उपचार मेडिकल कॉलेज में संभव है, उन्हें बाहर न भेजा जाए।
टीकाकरण पर जोर
डीएम ने सीएमओ को निर्देश दिए कि प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) के रूप में चिह्नित सीएचसी अतर्रा, बबेरू, नरैनी और जसपुरा में सिजेरियन प्रसव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिले में संचालित चार एनबीएसयू को पूरी तरह क्रियाशील करने और जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने को कहा गया। पूर्ण प्रतिरक्षण की प्रगति 93 प्रतिशत मिलने पर इसे शत-प्रतिशत करने के निर्देश दिए।