फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Banda News: एंबुलेंस और स्कूटर को भी जारी कर दिए खनिज ढोने के परमिट

विज्ञापन
फोटो11- जनपद बांदा में नदी में हो रहा बालू का खनन। (फाइल फोटो) - फोटो : आग बुझाने का प्र​शिक्षण लेते युवा।
विज्ञापन
बांदा। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने बुंदेलखंड में बालू और पत्थर (पहाड़) के खनन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हाल ही में जारी वर्ष 2016-17 से 2021-22 की पंचवर्षीय रिपोर्ट में चित्रकूट मंडल के चारों जिलों (बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा) सहित प्रदेश के 17 जनपदों में अवैध खनन और ओवर लोडिंग का खुलासा किया गया है। यह भी जिक्र है कि बालू-पत्थर की ढुलाई के लिए बड़े वाहनों के नाम पर स्कूटर, एंबुलेंस और ई-रिक्शा को भी ईएमएम-11 परमिट जारी कर किए गए।
विज्ञापन

इससे पहले भी कैग अपनी रिपोर्ट में बुंदेलखंड में अवैध खनन पर आपत्तियां जताईं थीं। पिछले हफ्ते जारी रिपोर्ट को हाल ही में विधानसभा में भी पेश किया गया। अन्य मुद्दों के साथ रिपोर्ट में अवैध खनन को प्रमुखता से उजागर किया गया है। रिपोर्ट में बालू खदानों और पहाड़ों में अवैध खनन तथा बगैर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के चल रहे स्टोन क्रशर का जिक्र किया गया है।
लगभग 148 पेज की अंग्रेजी में तैयार कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि बांदा में 45.48 हेक्टेयर में अवैध खनन किया गया है। हमीरपुर में 6.18 हेक्टेयर भूमि में अवैध खनन की बात कही गई है। बांदा में अवैध खनन तिंदवारी, पैलानी, बांदा , नरैनी आदि तहसीलों में किया गया है।
विज्ञापन

हमीरपुर में सरीला और चंदवारी क्षेत्रों में अवैध खनन और ओवर लोडिंग का जिक्र किया गया है। एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की रोक के बावजूद बुंदेलखंड में बालू का अवैध खनन और अवैध रूप से स्टोन क्रशर चल रहे हैं। अधिकतर क्रशर को एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं मिली है। (संवाद)

-
बिना भंडारण लाइसेंस के चल रहे क्रशर
कैग की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर सहित प्रदेश के 17 जिलों में खनन की जांच की गई है। चित्रकूट मंडल के चारों जिलों समेत प्रयागराज, सोनभद्र और सहारनपुर में कुल 1035 स्टोन क्रशर पाए गए। इनमें 613 क्रशर बिना भंडारण लाइसेंस के चलते मिले। इससे सरकार को तकरीबन 61 लाख रुपये से ज्यादा राजस्व का नुकसान पहुंचा। हमीरपुर में दो खनन परमिट का गलत भू-निर्देशांक पाया गया।
-
नदियों की जलधारा में खनन की अनुमति
कैग रिपोर्ट के मुताबिक बांदा में अछरौड़ और दादों खादर गांवों में बालू खनन के पट्टे नदी पुलों के नजदीक दिए गए। यह एनजीटी के नियमों के विपरीत है। अछरौड़ का पट्टा फरवरी 2026 और दादों का पट्टा अप्रैल 2027 तक के लिए दिया गया है। कैग ने एनजीटी के नियमों का हवाला देकर नदियों की जलधारा में बालू खनन के पट्टे/अनुमति देने पर आपत्ति जताई है।


लखनऊ से जारी होते हैं खनिज ढोने के परमिट
चित्रकूट मंडल सहित प्रदेश के 17 जिलों में ऐसे वाहनों को भी ई-एमएम- 11 परमिट जारी कर दिए गए जो वाहन खनिज परिवहन के योग्य या उपयुक्त नहीं थे। इन वाहनों में स्कूटर, बाइक, ई-रिक्शा, एंबुलेंस आदि शामिल हैं। परिवहन विभाग से क्रास मिलान में यह पोल खुली। चित्रकूट मंडल के अलावा ऐसा करने वाले अन्य जनपदों में फतेहपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, प्रयागराज, बुलंदशहर, संभल, सहारनपुर आदि शामिल हैं। बालू-पत्थर खनिजों के परिवहन के लिए यह परमिट/प्रपत्र खनिज, निदेशालय (लखनऊ) जारी करता है।
विज्ञापन


फोटो11- जनपद बांदा में नदी में हो रहा बालू का खनन। (फाइल फोटो)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें