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शोहरत न प्रचार, गुपचुप ढंग से हैं मददगार

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एक तरफ जहां लोग राशन या अन्य मदद बांटकर फोटो और शोहरत का ढिंढोरा पीट रहे हैं तो दूसरी तरफ कई लोग ऐसे भी हैं, जिनका फलसफा है- नेकी कर दरिया में डाल।
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लॉकडाउन और इस दौरान चल रहे रमजान में वे अपनी सामर्थ्य भर जरूरतमंदों को मदद पहुंचाने में जुटे हुए हैं लेकिन वे इसका प्रचार नहीं करते। ऐसे कुछ लोगों में पूर्व शिक्षाधिकारी जमीरूद्दीन सिद्दीकी व उनके पुत्र मुजीबुद्दीन (खाईपार), अनिल गुप्ता, सुभाषचंद्र अग्रवाल, संदीप गुप्ता, सोनल गुप्ता, (कटरा), हाजी महफूज व हाजी हिफर्जुरहमान (कोतवाली रोड), पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हाजी शकील अली, जामा मस्जिद व ईदगाह मुतावल्ली डा. श्ेाख सादी जमां, जितेंद्र कुमार शर्मा (अलीगंज) आदि हैं। इसी प्रकार युवाओं की टीम ‘कोरोना में गरीबों की मदद’ (अलीगंज) भी जरूरतमंदों की मदद में जुटी है।
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इस संबंध में इन लोगों ने कहा कि अक्सर किसी तरह की मदद लेते समय गैरतमंद जरूरतमंद फोटो खिंचते समय लज्जा से झेप जाते हैं। ऐसे में वे गुपचुप ढंग से मदद करना बेहतर समझते हैं। अपने वाहन से परेशान हाल व्यक्ति के घर जाकर राशन किट आदि जरूरत का सामान उसे सौंप देते हैं।
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