बड़ोखर बुजुर्ग। एक दशक पूर्व किसानों की आत्महत्याओं
से चर्चित रहा पड़ुई गांव अब फिर सुर्खियों में है। प्रदेश के प्रमुख सचिव
द्वारा 13 जनवरी को इस गांव में चौपाल लगाने और रात बिताने की खबर ने इस
गांव की कायापलट शुरू हो गई है।
दशकों से अधूरे या रुके पड़े काम रातों-रात पूरे हो रहे हैं। छोटे-बड़े अफसर और विकास से जुड़े कर्मचारियों का यहीं डेरा है।
मुख्य
सचिव आलोक रंजन बुधवार को बड़ोखर ब्लाक के पड़ुई गांव में रात बिताएंगे।
ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाएंगे। यह कार्यक्रम तय होते ही पड़ुई गांव में
तमाम अफसरों ने डेरा डाल दिया है।
29 लाख रुपये की लागत से
आनन-फानन में गांव का संपर्क मार्ग पीडब्ल्यूडी बनवा रहा है। दो साल से
स्कूल के खराब हैंडपंप को बनाने में जल निगम जुटा हुआ है।
बाल
पुष्टाहार की सुपरवाइजर अपनी टीम के साथ बच्चों को पंजीरी बांट रही हैं।
गांव के प्रेमचंद्र ने बताया कि इसके पहले कभी नहीं बंटी।
उधर, जूनियर स्कूलों को रंग-रोगन का काम तेजी से चल रहा है। अधूरे पड़े लोहिया आवासों को लाभार्थी खुद पूरा करने में जुटे हुए हैं।
शनिवार
को गांव में अफसरों और कर्मचारियों का जमघट और चहलकदमी रही। पांच साल से
गंदगी से अटा पड़ा नाला साफ हो रहा है। ग्राम पंचायत सचिव पात्र ग्रामीणों
से पेंशन के फार्म ले रहे हैं।
बीडीओ आरडी यादव खुद हर काम को मौके पर जाकर देख रहे हैं। हर अधिकारी ग्रामीणों से प्यार-मोहब्बत और पुचकार कर बात कर रहा है।
जिस स्कूल के कक्ष में मुख्य सचिव को रात बितानी है, वहां सब कुछ चकाचक किया जा रहा है। आसपास रोशनी और सफाई हो रही है।
राजस्व कर्मचारी गांव में कैंप लगाकर खसरा, खतौनी और राशन कार्ड बांट रहे हैं। अफसरों के वाहनों से गांव की गलियां आबाद हैं।