बांदा। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का भुगतान न होने से परेशान हैं। महिलाओं का कहना है कि सूखा राशन ब्लाॅक मुख्यालय से गांव तक ले जाने के लिए शासन से भाड़ा निर्धारित है, पर ब्लाॅक मिशन मैनेजर की मनमानी के कारण उन्हें तीन वर्ष से न तो भाड़े का भुगतान किया गया और न ही बीसी सखियों का तीन साल से मानदेय दिया गया। महिलाओं ने उच्चाधिकारियों से भुगतान की मांग की है।
कमासिन में समूह की महिला अध्यक्ष उमा सिंह ने बताया कि बाल विकास परियोजना कार्यालय से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सूखा राशन गांव तक लेने जाने में अपनी जेब का पैसा खर्च करना पड़ रहा है। तीन वर्ष से भाड़े का भुगतान नहीं किया गया। इटरा ग्राम की समूह अध्यक्ष मालती देवी ने बताया की चकरेही, भीती, भादांव गांव में समूह की दीदियों को भुगतान के लिए दौड़ाया जा रहा है। कहा कि ब्लॉक मिशन प्रबंधक भरत द्विवेदी कहते हैं कि भाड़ा व मानदेय ऊपर से ही नहीं आ रहा है।
सामुदायिक शौचालय में संचालन का कार्य देख रहीं निशा का कहना है कि उनके मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। ईटरा की मालती देवी ने बताया कि छह माह के लिए उनका चयन बीसी सखी में किया गया था। इसमें चार माह का भुगतान किया गया है। आगे का भुगतान नहीं किया गया। जानकी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष गुड़िया देवी ने बताया कि लगातार तीन वर्ष से बाल विकास परियोजना कमासिन से सुखा राशन की ढुलाई आंगनबाड़ी केंद्र तक किया जा रहा है। अभी तक किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया। भुगतान मांगने पर कमीशन की मांग की जाती है।
बीएमएम ने डेढ़ लाख रुपये का लगाया चूना
संगठन अध्यक्ष अध्यक्ष उमा सिंह ने बताया कि ग्राम संगठन के खाते से डेढ़ लाख रुपये बीएमएम ने समूह सदस्यों के हस्ताक्षर कर निकाल लिया। नोटिस आने पर मामला खुला, जिसकी जांच रिपोर्ट शासन व जिला प्रशासन को भेजी गई है।
वर्जन-
-मानदेय व भाड़ा के भुगतान को लेकर अभी शिकायत नहीं आई है। प्रार्थनापत्र मिलने पर वह ब्लाॅक मिशन मैनेजर के माध्यम से भुगतान कराएंगे। -भइयनराम, उपायुक्त, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, बांदा