खप्टिहा कलां गांव मेें रामलीला में परशुराम-लक्ष्मण संवाद।
- फोटो : अमर उजाला
रामलीला के 50 वर्ष पूरे होने पर मनाए जा रहे स्वर्ण जयंती समारोह में बाल रामलीला कमेटी (द्वबा) परिसर में पांच दिवसीय वनवासी रामलीला के दूसरे दिन मंगलवार की रात सीता स्वयंवर व परशुराम-लक्ष्मण संवाद का कलाकारों ने मंचन किया। जय श्रीराम के जयघोष गूंजते रहे।
सीता स्वयंवर में राजा जनक ने कहा कि शिव धनुष तोड़ने वाला ही बेटी सीता का वरण करेगा। राजा धनुष को हिला भी नहीं सके। गुरु विश्वामित्र का आदेश मिलते ही श्रीराम ने धनुष तोड़ दिया। धूमधाम से सीता-राम विवाह हुआ। परशुराम धनुष टूटने पर क्रोधित हो उठे। लक्ष्मण जी से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। बाद में अपने आराध्य को पहचान परशुराम कहते हैं ‘राम रमापति कर धन लेहूं, खैंचति चाप मिटा संदेहू’।
राम का किरदार रोहित पांडे (फतेहपुर), लक्ष्मण का अभिनय सचिन तिवारी, परशुराम का किरदार कमल किशोर शुक्ल (फतेहपुर), जनक का किरदार आशीष चतुर्वेदी (कानपुर), विश्वामित्र पंडित महेंद्र मिश्रा और हास्य कलाकार ललित किशोर शुक्ला (फतेहपुर) ने किया। व्यास पीठ पर समर सिंह, तबले पर गुड्डन तिवारी, नाल पर दीनदयाल तिवारी ने संगत की। संचालन मनोज दीक्षित ने किया।