राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रवक्ता डॉ. सबीहा रहमानी को सम्मानित करते डॉ. मोहम्मद रफीक।
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राजकीय महिला डिग्री कालेज में दो दिवसीय राजकीय संगोष्ठी के समापन समारोह में नए भारत में महिलाओं की भूमिका विषय पर मंथन हुआ। पटना (बिहार) के शोध छात्र प्रतीक कुमार ने महिलाओं के संगठित और असंगठित क्षेत्रों का वर्णन किया। मुंबई विश्वविद्यालय के स्नातक छात्र सूरज यादव ने अविवाहित महिलाओं के जीवन में आने वाली कठिनाइयां बताईं। यह भी कहा कि महिलाएं पुरुषों से किसी भी स्थिति में कम नहीं है।
रविवार को समापन समारोह में दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट के डॉ. रजनीश ने महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकारों की वकालत की। पीजी कालेज, हरदोई के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मौर्य ने महिलाओं को सशक्त बनाने का श्रेय पंचायती राज व्यवस्था को दिया। फैजाबाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डॉ. रवि प्रकाश मौर्य ने महिलाओं को छोटे रोजगार अपनाने की भी सलाह दी। एमिटी यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा की शिक्षक सदफ खान ने भारत में महिला उद्यमिता पर चर्चा की।
अंतिम चरण में गोष्ठी को डॉ. मोहम्मद रफीक ने कहा कि महिलाओं में क्षमता की कमी नहीं है। जरूरत है उन्हें प्रेरित करने की। डाम्. राकेश राणा ने कहा कि आधुनिक और नए भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अहम है। महाविद्यालय प्रवक्ता डॉ. सबीहा रहमानी ने अपने विचार शेर सुनाकर व्यक्त किए- इस अहद के सभी मंजर बदलते जा रहे हैं, हम माहताब से आफताब होते जा रहे हैं।
विजय कुमार शुक्ल ने शोध पत्र में स्त्री शिक्षा के विकास पर जोर दिया। अजय सिंह चौहान, डॉ. जेपी सिंह, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के डॉ. ललित आदि ने भी संबोधित किया। डॉ. माया वर्मा ने आभार जताया। गोष्ठी में प्रभावशाली संबोधन और अपने तर्कों की प्रस्तुति करने के लिए कई वक्ताओं को सम्मानित किया गया। अकील अहमद, फजलुद्दीन रहमानी, श्रद्धा निगम, नेपाल सिंह, रजनी भार्गव सहित महाविद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।