तिंदवारी थाना क्षेत्र के जसईपुर और धौसड़ गांव में जश्न का माहौल है। यहां के छह मछुआरे पाकिस्तानी जेल से रिहा होने के बाद घर पहुंचे हैं। इन सभी को पिछले साल 15 मार्च को ओखा (गुजरात) के समुंदर में मछली मारते समय पाकिस्तानी सीमा में दाखिल होने पर वहां की सेना ने गिरफ्तार कर लिया था।
कराची (पाकिस्तान) की लांड्री जेल से रिहा हुए जसईपुर गांव के रफीक, उसके भाई सिद्दीक व एक अन्य शिव कुमार और धौसड़ गांव के आशिक अली व राजाराम के अलावा महोखर गांव का कामता बुधवार की शाम अपने गांव पहुंचे। गांववालों ने उनका स्वागत किया।
तीनों गांवों में ईद-दीवाली जैसा जश्न मनाया गया। घरों में दाखिल होते ही खुशियां मार्मिक दृश्य मेें बदल गईं। किसी को उसका बिछड़ा बेटा मिला तो किसी को पति और भाई। एक-दूसरे से मिलकर सभी की आंखें छलक पड़ीं।
रफीक मोहम्मद ने अमर उजाला को बताया कि पिछले वर्ष 8 मार्च को अपने घर से ओखा (गुजरात) के लिए रवाना हुए थे। 14 मार्च को वह बोट लेकर सभी 6 साथियों के साथ समुंदर में मछली पकड़ने गया था। बोट खुद चला रहा था।
15 मार्च को सुबह पाक नौसैनिकों ने सभी को पकड़ लिया और कराची कोतवाली में दो दिन बंद रखा। अदालत में पेश करने के बाद लांड्री जेल भेज दिया। शिव कुमार के मुताबिक 2 अगस्त को पाक जेल से 163 बंदी रिहा किए गए थे।
जेल से रिहा होने के बाद कराची (पाकिस्तानी) की स्वैच्छिक संगठन 'ईदी फाउंडेशन’ ने सभी को 5-5 हजार रुपये के साथ तोहफे देकर विदा किया। पाक सेना ने सभी को वाघा सीमा में भारतीय सेना के हवाले कर दिया। अमृतसर से भारतीय सेना ने उन्हें विशेष ट्रेन में बैठाकर घर के लिए रवाना कर दिया।
चार और मजदूर पाक जेल में
जनपद के 4 युवक पिछले सात माह से पाकिस्तान के कराची में स्थित लांड्री जेल में कैद हैं। इनका जुर्म इतना था कि मछली का शिकार करने के दौरान समुंदर में यह पाक सीमा में दाखिल हो गए थे।
पाक जेल से रिहा हुए जसईपुर गांव निवासी रफीक मोहम्मद पुत्र लल्लू खां और शिव कुमार पुत्र रामखिलावन ने बताया कि जिले के 4 युवक पिछले 7 माह से पाकिस्तान के कराची शहर की लांड्री जेल में बंद हैं। ये सभी तिंदवारा बांदा और जलालपुर गांव के रहने वाले हैं।
चारों युवक ओखा (गुजरात) में मजदूरी के लिए गए थे। फरवरी माह में ये एक मछली ठेकेदार के यहां मजदूरी करने लगे। शिकार के दौरान समुंदर मे ये अनजाने में पाक सीमा में दाखिल हो गए। पाकिस्तानी नौसैनिकों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। इसकी जानकारी इनके परिजनों को नहीं थी। एक माह पूर्व ठेकेदार ने फोन करके इनके परिजनों को जानकारी दी और भरोसा दिलाया कि वह रिहाई का प्रयास कर रहा है।
कमाऊ पूत पाक जेल में थे, परिवार ने झेली भुखमरी
बांदा। बेटों के पाकिस्तान जेल में कैद होने से यहां जसईपुर गांव में रह रहे माता-पिता पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा। उनके कमाऊ पूत न रहने से उन्हें रोटी के लाले पड़ गए। रफीक और सिद्दीक के पिता लल्लू खां बताते हैं कि दोनों बेटों घर मे न रहने से की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई।
उसने और उसकी बूढ़ी पत्नी ने काफी तकलीफें उठाईं। गुजरात से आए सेठ के फोन से पता चला कि उसके दोनों बेटे जेल में हैं। पिता के मुताबिक ट्रेन हादसे में उसका एक पैर कट चुका है। वह चल-फिर नहीं सकता। बूढ़ी पत्नी कुसुमिया मजदूरी करके अपना और उसका पेट पालती रही।
यूपी सरकार से मछुवारों को मलाल
बांदा। पाकिस्तानी जेल से रिहाई की खबर के बाद सभी छह मछुवारों के घर खुशी लौट आई है, लेकिन परिवार के लोगों को मलाल है कि पाकिस्तान का जुल्म सहकर वतन लौटे मछुवारों को उत्तर प्रदेश सरकार कोई तवज्जो नहीं देती। न ही प्रशासन के किसी अफसर ने सुध ली।
गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्र शासित सरकारें पाकिस्तानी व श्रीलंकाई जेलों में कैद रहे अपने प्रदेश के बाशिंदों के परिवारों को हर माह 4,500 रुपये मदद दे रही हैं।
भ्रष्ट हैं पाक जेल के कर्मचारी
बांदा। पाकिस्तान की जेल में कई वर्ष गुजार कर आए राजाराम (धौसड़) ने बताया कि पाक जेल में भ्रष्टाचार चरम पर है। जेल अधिकारी बंदियों के राशन और पैसे छीन लेते है। बंदीरक्षक को कोई कैदी 100 रुपये पकड़ा दे तो वह उसकी गुलामी करने को तैयार हो जाता था।
रफीक मोहम्मद ने बताया कि फुर्सत के क्षणों में पाकिस्तान जेल में ही भारतीय नौसेना के पानी वाले जहाज तटरक्षक के नमूने पर खिलौना बनाया। यह हुनर उसके साथ बंद पंजाब के कैदी ने सिखाया था। रिहाई पर तटरक्षक का नमूना वह अपने साथ ले आया है।