शाहपाटन गांव में पॉलिथीन डालकर झोपड़ी में गुजर बसर कर रहीं भूरा की पत्नी।
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बांदा(नरैनी)। शाहपाटन गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना चंद चहेतों तक सीमित है। गांव में अनेकों परिवार अभी भी पॉलिथीन और झोपड़ी में जीवन गुजार रहे हैं। योजना के लाभ से वंचित इन ग्रामीणों का कहना है कि आवास आवंटन करने वालों को देने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। इससे आवास नहीं मिला।
शाहपाटन गांव की आबादी लगभग साढ़े तीन हजार है। एक-दो घरों को छोड़कर पूरा गांव झोपड़ियों में आबाद है। अंत्योदय परिवारों के उत्थान की योजनाएं यहां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। बानगी के लिए रामबहादुर पुत्र राजाराम, कौशल पुत्र विद्या निषाद, भूरा पुत्र रम्मा, शिवशंकर काफी हैं। यह झोपड़ियों में पॉलिथीन डालकर बसर कर रहे हैं। गांव के शिवशंकर, रामप्रसाद, रजुलिया, चिरकोटी आदि ने आरोप लगाया कि आवास योजना का लाभ ज्यादातर उन्हीं को मिला, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं। ग्रामीणों ने प्रधान और सचिव पर वसूली के आरोप लगाए हैं।
खंड विकास अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि वर्ष 2019-20 में गांवों को 58 और बीते तीन वर्षों में 45 आवास दिए जा चुके हैं। गांव में आवास से वंचित लोगों के नाम नई सूची में शामिल किए जाएंगे। बीडीओ ने कहा कि उन्हें आवास देने के बदले रुपये लेने की जानकारी नहीं है। अपात्रों को आवास देने और भ्रष्टाचार करने की जांच कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
अपात्रों को आवास की कराएंगे जांच
बांदा। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण परियोजना अधिकारी आरपी मिश्र ने बताया कि वर्ष 2008 की बीपीएल सूची के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जाता है। शाहपाटन में अगर अपात्रों को आवास दिए गए हैं तो इसकी वह जांच कराएंगे। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करेंगे। किसी पात्र का नाम बीपीएल सूची में नहीं है तो उसकी सूची अलग से बनवाकर शामिल किया जाएगा।