बांदा। प्रतिमाह 10 करोड़ का राजस्व देने वाली पैलानी तहसील में अब खुद का सब-रजिस्ट्रार कार्यालय होगा। अभी तक पैलानी तहसील बांदा कार्यालय से संबद्ध थी।
तहसील में प्रतिमाह करीब 200 बैनामा, वसीहत, इकरार नामा, दान की जमीन आदि रजिस्ट्रियां होती थीं। इसके अलावा 11 मौरंग की खदानें हैं। जिनके पट्टों से भी अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होता था। पैलानी तहसील से बांदा सदर कार्यालय की दूरी 40 किमी है। जिससे यहां के लोगों को आवागमन में परेशानी होती थी। तहसील गठन के 11 साल बाद आखिरकार पैलानी को अपना सब-रजिस्ट्रार कार्यालय मिल गया है। यूपी सरकार के विशेष सचिव सुधीर कुमार के द्वारा जारी आदेश के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। शासन ने रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा पांच व सात के तहत जिला बांदा में 119 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित करते हुए नया रजिस्ट्रीकरण उप जिला पैलानी सृजित कर दिया है।
119 गांवों के लोगों को रजिस्ट्री के लिए नहीं जाना पड़ेगा बांदा
सदर, नरैनी, बबेरू और अतर्रा के बाद पैलानी जिले का नया सब-रजिस्ट्रार कार्यालय बन गया है। समाजसेवी लक्ष्मीकांत गुप्ता ने बताया कि पैलानी तहसील की पुनर्स्थापना के लिए 28 वर्षों तक लगातार संघर्ष हुआ था। जिसका परिणाम 20 फरवरी 2014 को तहसील स्थापना के रूप में मिला लेकिन रजिस्ट्री कार्यालय न होने से तहसील अधूरी थी और हर छोटे-बड़े भूमि कार्य के लिए लोगों को बांदा मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती थी। जनता, तहसील संघर्ष समिति और बार एसोसिएशन पैलानी द्वारा लगातार भेजे गए ज्ञापनों के बाद शासन ने 8 दिसंबर 2025 को पैलानी रजिस्ट्रीकरण कार्यालय की स्वीकृति दे दी।