बांदा। मौसम की मार और दिन-रात खेत में बिताकर अन्ना गायों से बचाकर तैयार किए धान की कीमत हासिल करने के लिए चित्रकूटधाम मंडल के किसानों को अब खरीद केंद्रों का चक्कर काटना पड़ रहा है। मंडल के 1057 किसानों ने इस उम्मीद से सरकारी खरीद केंद्रों में धान बेचा था कि उन्हें 72 घंटे के अंदर कीमत मिल जाएगी, सरकार का यह वादा पूरा नहीं हो रहा है। करीब 40 दिनों से किसान अपने धान के 10 करोड़ से ज्यादा रुपये हासिल करने के लिए भटक रहे हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में मुख्यत: बांदा और चित्रकूट जिलों में ही धान की फसल होती है। इस वर्ष मंडल में 97 हजार हेक्टेयर में किसानों ने धान बोया था। यह फसल तैयार हो चुकी है। 25 नवंबर से मंडल के सरकारी खरीद केंद्रों में धान की खरीद चल रही है। इस वर्ष 80 हजार 650 मीट्रिक टन (एमटी) धान की खरीद का सरकारी लक्ष्य है। इसमें अब तक सरकारी व प्राइवेट एजेंसियों में कुल 3309 किसानों से 22,389 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है।
इसकी कुल कीमत 42.14 करोड़ रुपये होती है। जिसमें 2242 किसानों का 32.11 करोड़ रुपये दे दिया गया है। लेकिन 1057 किसानों अपनी मेहनत की कीमत हासिल करने के लिए खरीद केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं। इन किसानों को खरीद केंद्रों से 10 करोड़ 3 लाख रुपये पाना है। इस वर्ष सरकार ने धान खरीद का समर्थन मूल्य 1885 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
किसानों के मुताबिक खरीद केंद्रों में उन्हें यह कहकर लौटाया जा रहा है कि अभी बजट नहीं है। आने पर भुगतान होगा। खरीद केंद्रों के इस रवैए से प्रदेश सरकार के उस शासनादेश की हवा निकल गई है जिसमें किसानों को 72 घंटे के अंदर भुगतान करते हुए पैसा उनके खाते में भेजे जाने का आदेश दिया गया है।
धान खरीद लक्ष्य (मीट्रिक टन में), खरीद और किसानों का बकाया (लाख रुपये में)
जनपद लक्ष्य खरीद भुगतान अवशेष
बांदा 72,650 19,554 2939.581 754.876
चित्रकूट 8,000 2,835 271.939 248.344
योग 80,650 22,389 3211.520 1003.22
पीसीएफ और यूपीपीसीयू ने खरीदा ज्यादा धान
बांदा। मंडल में पीसीएफ ने सर्वाधिक 4,791 मीट्रिक टन धान खरीदा है। दूसरे नंबर पर यूपीएसएस है। यहां 4,687 एमटी धान खरीदा गया। तीसरे नंबर पर विपणन ने 2,471 एमटी धान की खरीद की है। प्राइवेट एजेंसियों में सबसे ज्यादा यूपीपीसीयू ने 9,401 एमटी धान खरीदा है। इसके अलावा कर्मचारी कल्याण निगम ने 14.68 एमटी धान खरीद की है। एग्रो की पांच एजेंसियां हैं, लेकिन धान नहीं खरीदा।
खातों में खामियों से भुगतान में देरी
बांदा। संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) देवी प्रसाद का कहना है कि किसानों के भुगतान में देरी की मुख्य वजह खातों में खामियां हैं। ऑनलाइन भुगतान से भी कुछ बैंकों में तकनीकी समस्याएं हैं। सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को पत्र भेजकर सारी कमियां जल्द दुरुस्त कराकर भुगतान के निर्देश दिए हैं। उम्मीद है कि दो दिन के अंदर किसानों के खाते में पैसा पहुंच जाएगा।