जिला अस्पताल में बेंच पर लिटाकर बालिका को दी जा रही ऑक्सीजन।
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बांदा। जिला अस्पताल दो शिफ्टों में संचालित करने की तैयारी है। दूसरी तरफ पहली ही शिफ्ट में मरीजों को सुविधाओं और दवाओं के लाले हैं। मरीजों की संख्या में जरा भी वृद्धि होते ही जिला अस्पताल के इंतजामों की पोल खुल जाती है। इन दिनों यही हाल है। गंभीर मरीजों को भी बेड मयस्सर नहीं। बेंच पर लिटाकर ऑक्सीजन दी जा रही है। कोई बरामदे के फर्श पर भर्ती है तो किसी को स्ट्रेचर के अभाव में मरीजों को गोद और कंधे पर ढोना पड़ रहा है।
शासन जिला अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर दो शिफ्टों में संचालित करने की तैयारी में हैं। दूसरी तरफ सुविधाएं और स्टाफ बढ़ाना तो दरकिनार सृजित पदों के अनुरूप भी नियुक्तियां नहीं हुई हैं। जिला अस्पताल में 27 डाक्टरों के पद सृजित हैं, लेकिन मात्र 12 ही कार्यरत हैं। कई डाक्टर दूसरे विशेषज्ञों के मरीज भी देख रहे हैं। यही वजह है कि इलाज से ज्यादा जिला अस्पताल रेफर सेंटर बन गया है।
उधर, उपकरणों और संसाधनों का भी टोटा है। अस्पताल के स्टोर में भले ही ये उपलब्ध हो, लेकिन मरीजों को मयस्सर नहीं है। जिला अस्पताल में रोजाना ये नजारे हमेशा दिखाई पड़ते हैं कि मरीजों को बरामदे की फर्श पर लिटाकर इलाज किया जा रहा होता है। स्ट्रेचर या व्हीलचेयर न मिलने पर अक्सर तीमारदार मरीजों को गोद में या पैदल ले जाते हैं। शनिवार को भी यही दृश्य थे। गंभीर बालिका को ऑक्सीजन तो दे दी गई पर पलंग नहीं मिला।
उसे बेंच पर ही लिटाकर ऑक्सीजन दी गई। इन दिनों जिला अस्पताल में मौसमी मरीज भी बढ़े हैं। मुख्यमंत्री की मंडलीय समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित है। इसके बावजूद भी व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हो रहा। उधर, सीएमएस डॉ. किशोरीलाल का कहना है कि रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए कई बार शासन को लिखा जा चुका है।