लघु सिंचाई विभाग की पांच रिग मशीनों में चार खराब हैं। सिर्फ एक रिग मशीन से पूरे जनपद में बोरिंग कराई जा रही है। इसका सीधा फायदा ठेकेदार उठा रहे हैं। ठेकेदारों की मशीनों से बोरिंग कराकर लाखों रुपये के भुगतान किए जा रहे हैं।
लघु सिंचाई विभाग नलकूपों के लिए बोरिंग कराता है। विभाग के पास सरकारी कुल पांच रिग मशीनें हैं। जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता ने आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ल को दी सूचना में बताया है कि चार मशीनें खराब स्थिति में हैं। सिर्फ एक रिग मशीन ही काम कर रही है।
पिछले वर्ष 2013-14 मेें विभागीय मशीन से 31 और ठेकेदारों की मशीन से 77 बोरिंग कराई गई। इसी तरह चालू वर्ष 2014-15 में विभागीय मशीन से सिर्फ 17 बोरिंग हुई हैं जबकि पंजीकृत ठेकेदारों की मशीन से 29 बोरिंग कराई गई है।
सूचना में यह भी बताया गया है कि सिर्फ एक मशीन में कुल 19 कर्मचारी तैनात हैं। यानि पांच मशीनों का स्टाफ एक मशीन पर ही लगा दिया गया है। इस विभाग में कुल चार पंजीकृत ठेकेदार बताए गए हैं।
बोरिंग में इस्तेमाल होने वाली ग्रेविल की आपूर्ति में भी कमीशनबाजी का खेल खेला जा रहा है। आमतौर पर 2800 रुपये प्रति घन फीट दर पर मिलने वाली ग्रेविल का भुगतान लघु सिंचाई विभाग 3822 रुपये प्रति घन फीट की दर से कर रहा है।
इसी तरह कंप्रेशर की लागत विभाग 2762 रुपये प्रति घंटा बताई गई है जबकि पंजीकृत ठेकेदारों की मशीनों का रेट 2300 रुपये प्रति घंटा है। बोरिंग में इस्तेमाल होने वाले पाइप की दर 1287 रुपये प्रति मीटर बताई गई है।