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शौकीनों को देना होगा अब शस्त्र चलाने का टेस्ट

Fri, 02 Jan 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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असलहा के शौकीनों को अब लाइसेंस हासिल करने के लिए कई और मशक्कत करनी होंगी। उन्हें शस्त्र चलाने का टेस्ट भी देना होगा।
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राइफल का लाइसेंस देने का अधिकार डीएम से छीनकर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंप दिया गया है। गृह सचिव ने इस बाबत आदेश जारी किए हैं। नव वर्ष पर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए शस्त्र जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव किया है।

नए नियमों के तहत अब 12 बोर के शस्त्रों के लाइसेंस के लिए डीएम लाइसेंसिंग प्राधिकारी रहेंगे। इनसे उच्च श्रेणी के लाइसेंस के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसमें डीएम, डीआईजी, एसपी और एएसपी सदस्य होंगे।
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नए लाइसेंस के समय आवेदक को शस्त्र चलाने का टेस्ट देना होगा। टेस्ट में प्रयोग होने वाले कारतूस का खर्च भी आवेदक को उठाना होगा। आवेदनपत्र में आवेदक के फिंगर प्रिंट भी अनिवार्य होंगे। इसके अलावा आवेदक की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ अदेयता (नोड्यूज) की स्थिति भी जानी जाएगी। छह माह में शस्त्र नहीं खरीदने पर लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।

65 साल से अधिक उम्र के लाइसेंस धारकों को सीएमओ से प्रमाणित स्वास्थ्य प्रमाण पत्र देना होगा। अनुमन्य सीमा 25 कारतूस से अधिक की जरूरत होने पर शासन का अनुमोदन प्राप्त करना होगा।
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सेफ कस्टडी असलहों का होगा निरीक्षण
निजी दुकानों की सेफ कस्टडी में जमा शस्त्रों का दुरुपयोग रोकने के लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा। जमा शस्त्रों के सत्यापन की कार्रवाई की जाएगी। शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग रोकने के लिए मालखाने अथवा निजी क्षेत्र की दुकान में शस्त्र जमा कराते समय लाइसेंसी 100 रुपये का उसी तिथि का चालान राष्ट्रीयकृत बैंक से प्राप्त कर प्रस्तुत करेगा।
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