बांदा। प्रतिदिन सात हजार यात्रियों का सफर, 158 बसों का बेड़ा, लेकिन सुविधाएं शून्य। यह स्थिति है
रोडवेज बस स्टैंड की। बस स्टैंड के प्रवेश और निकास द्वार पर चोक नालों के कारण गंदगी और जलभराव की समस्या बनी हुई है। चित्रकूट, फतेहपुर और महोबा जाने वाली बसों के लिए यात्रियों को जिस हिस्से से होकर गुजरना पड़ता है, वहां नाले का गंदा और बदबूदार पानी भरा रहता है।
बस स्टैंड के अंदर प्रवेश करते ही कई जगह जलभराव और गंदगी नजर आती है। जल निकासी के लिए बनाई गई नालियां कई स्थानों पर टूटकर बंद हो चुकी हैं। पानी की निकासी नहीं होने से बारिश का पानी परिसर में ही जमा रहता है।
यात्रियों के बैठने वाले स्थानों के आसपास भी यही स्थिति है। कचरे को समय से नहीं हटाए जाने से गंदगी बनी रहती है। बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों को जलभराव और कचरे के बीच बैठना पड़ता है।
सबसे खराब स्थिति यात्रियों के लिए लगाए गए वाटर कूलर के आसपास है। वाटर कूलर में लगी टोटी के नीचे ही गंदगी जमा है। वहीं यूरिनल की सफाई ठीक से नहीं होने के कारण वह गंदगी से भरा रहता है।
इससे यूरिनल से उठने वाली दुर्गंध भी पानी की टंकी तक पहुंचती है। रक्षाबंधन के दौरान बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ने के बावजूद बस स्टैंड की सफाई व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
रोडवेज बस स्टैंड से परिवहन निगम की रोजाना 158 बसें संचालित होती हैं। इन बसों से प्रतिदिन करीब छह से सात हजार यात्री सफर करते हैं। नियमित मासिक टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी 700 से 1000 के बीच है।
-
दो सफाई कर्मियों के भरोसे व्यवस्था
निगम के अधिकारियों का कहना है कि बस स्टैंड पर दो सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं। वह नियमित सफाई करते हैं। इसके बावजूद परिसर के अंदर और बाहर कई स्थानों पर गंदगी और जलभराव नजर आ रहा है। वहीं, बस स्टैंड के बाहर भी स्थिति बेहतर नहीं है। प्रवेश और निकास गेट के दोनों ओर गंदगी फैली है। बरसात के कारण यहां कीचड़ बन गया है। इसी स्थान पर फल की दुकानें लगती हैं। दुकानों से निकलने वाला कचरा भी आसपास ही फेंक दिया जाता है।
बारिश बाद ऊंचा होगा गेट का एरिया, बनेगा नाला : देशराज
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक देशराज ने बताया कि निगम के पास सफाई कर्मचारी हैं और नियमित सफाई कराई जा रही है। बाहर बने यूरिनल की स्थिति खराब है, उसकी सफाई की व्यवस्था कराई जाएगी। गेट के पास जलभराव और गंदगी दूर करने के लिए निगम की ओर से मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है।
इसमें दोनों गेटों के एरिया को ऊंचा करने और नाला निर्माण, परिसर के अंदर नालियों की मरम्मत, यूरिनल आदि शामिल हैं। मुख्यालय से स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। 15-20 दिन में गेट के आसपास की समस्या दूर करने का काम शुरू भी हो सकता है। जलभराव की समस्या बड़ी है और इसके लिए निगम के पास बजट नहीं होता है, इसलिए इसका प्रस्ताव भेजा गया है।
फोटो 3- बस स्टैंड के निकास द्वार पर जमा गंदा पानी यहां से पैदल निकलना है मुश्किल। संवाद
फोटो 3- बस स्टैंड के निकास द्वार पर जमा गंदा पानी यहां से पैदल निकलना है मुश्किल। संवाद
फोटो 3- बस स्टैंड के निकास द्वार पर जमा गंदा पानी यहां से पैदल निकलना है मुश्किल। संवाद
फोटो 3- बस स्टैंड के निकास द्वार पर जमा गंदा पानी यहां से पैदल निकलना है मुश्किल। संवाद