सर्व शिक्षा अभियान समेत कई अन्य अभियान चलाकर
स्कूल-कॉलेजों में बच्चों की संख्या बढ़ाने की कवायदें तो हो रही हैं लेकिन
शिक्षण संस्थान घट रहे हैं। पिछले तीन साल के ये आंकड़े अर्थ एवं संख्या
विभाग से मिले हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में जहां एक तरफ साल दर साल
छात्रों की संख्या बढ़ रही है तो दूसरी तरफ स्कूल कम पड़ते जा रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, मंडल में एक लाख आबादी पर मात्र 82 प्राथमिक स्कूल हैं
यानि 1219 पर एक स्कूल।
इसी तरह उच्च प्राथमिक स्कूल प्रति एक लाख
आबादी पर मात्र 38 हैं यानि 2631 पर एक जूनियर हाईस्कूल है। माध्यमिक
शिक्षा का भी यही हाल है। एक लाख आबादी पर मंडल में सिर्फ छह स्कूल हैं
यानि 16,666 आबादी पर है महज एक इंटर कॉलेज।
चित्रकूटधाम मंडल की
जनसंख्या ताजी जनगणना के मुताबिक 47.71 लाख का आंकड़ा पर कर चुकी है। इसमें
यह स्थिति उभरकर सामने आई है कि चित्रकूटधाम मंडल मेें साल दर साल आबादी
के अनुपात में स्कूल-कॉलेज घट रहे हैं। वर्ष 2010-11 मेें प्रति एक लाख
आबादी पर मंडल में प्राथमिक स्कूल 97 थे।
वर्ष 2012-13 में स्कूलों
का यह औसत घटकर 82 हो गया। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2010-11
में प्रति एक लाख आबादी पर 43 थे। वर्ष 2012-13 में प्रति लाख जनसंख्या पर
38 विद्यालय रह गए। माध्यमिक शिक्षा में वर्ष 2010-11 मेें मंडल में प्रति
लाख आबादी पर छह स्कूल थे।
वर्ष 2011-12 में यह संख्या बढ़कर सात
हो गई, लेकिन 2012-13 मेें फिर छह स्कूलों का औसत आ गया। महाविद्यालय और
स्नातकोत्तर महाविद्यालय का हाल और भी खराब है। मंडल मेें एक लाख आबादी पर
इनका एक का भी औसत नहीं है।
आबादी के बढ़ते आंकड़े यह बताते हैं कि
स्कूलों में उपस्थिति शत-प्रतिशत होने लगे तो बच्चों के बैठने का ठिकाना न
बचे। डेढ़ हजार से लेकर 16 हजार आबादी पर सिर्फ एक स्कूल नाकाफी है। आबादी
बढ़ रही है पर उसके अनुपात में शिक्षण संस्थानों की संख्या में वृद्धि नहीं
हो रही।