बांदा। रोजी-रोटी की तलाश में पुश्तैनी गांवों को छोड़कर घरों पर ताले डालकर नगरों को पलायन कर जाना बुुंदेलखंड की नियति बन गई है। केंद्र और राज्य में कोई भी सरकारें रहीं हों, यहां से लोगों का पलायन रोक नहीं पाईं। साल दर साल इसमें इजाफा हो रहा है। बुंदेलखंड की लगभग 20 फीसदी आबादी पलायन किए हुए है। इस लोकसभा के चुनाव में भी लगभग 20 लाख मतदाता पलायित हैं। मतदान के लिए इन्हें वापस लाना चुनाव आयोग और प्रत्याशियों के लिए चुनौती है। हालांकि दोनों ही स्तरों पर कवायदें चल रही हैं।
बुंदेलखंड में कोई बड़ा उद्योग नहीं है, जिसमें रोजगार के अवसर हों। दो दशकों से सूखा जैसी कुदरत की मार पड़ने से खेती भी चौपट हो गई। गांव के खेतिहर मजदूरों के हाथ काम से खाली हो गए। उन्हें दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए। उनके सामने पलायन ही एकमात्र रास्ता बना। देश का शायद ही कोई महानगर हो, जहां बुंदेलखंड के पलायित मजदूर न हों। दिल्ली, सूरत, पंजाब, अहमदाबाद, मुंबई, राजस्थान आदि में लाखों की संख्या में बुंदेली मजदूर पड़े हैं। इसमें अधिकांश तो तीज त्योहारों पर भी वापस घर नहीं लौटते।
बुंदेलखंड की आबादी (2011 की जनगणना के अनुसार)
जनपद आबादी
बांदा 17,99,410
चित्रकूट 9,91,730
हमीरपुर 11,04,285
महोबा 8,75,958
जालौन 16,89,974
झांसी 19,98,603
ललितपुर 12,21,592
योग 96,59,718
22 लाख लोगों का पलायन
बांदा। बुुंदेलखंड में पलायन के आंकड़े प्रदेश के अर्थ एवं संख्या प्रभाग (नियोजन विभाग) भी जारी करता है। जनगणना के आंकड़ों में लगभग 22 लाख लोगों को बुंदेलखंड से पलायन दर्ज किया था। इनमें पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की भी अच्छी खासी तादाद है।
प्रत्याशी और प्रशासन कर रहे वापस लाने की कवायद
बांदा। पलायित मजदूरों को मतदान के लिए वापस बुलाने की कोशिशें सरकारी मशीनरी और प्रत्याशी दोनों ही कर रहे हैं। बांदा के जिला निर्वाचन अधिकारी हीरालाल ने जिले के सभी पलायित लोगों की सूची तैयार कराई है। हर गांव में बीएलओ उनसे संपर्क कर रहे हैं। पलायित लोगों को मतदान के लिए बुलाया जा रहा है। मजदूर ठेकेदारों पर भी मजदूरों को वापस लाने का दबाव है। इसके लिए श्रम विभाग के अधिकारी जुटे हुए हैं। चित्रकूटधाम मंडल के उपायुक्त श्रम अनुराग मिश्रा बरेली और फतेहपुर जिले में वहां के ठेकेदारों से बैठक कर आए हैं। ब्यूरो
56 में 25 परिवार पलायित
बांदा। अतर्रा ग्रामीण (बांदा) के भोड़ा पुरवा में 56 परिवार आबाद हैं। आबादी लगभग 600 है। विद्याधाम समिति के राजाभइया बताते हैं कि इस पुरवा में 25 परिवार (214 लोग) पलायन कर गए हैं। उनके घरों पर ताले लटक रहे हैं। गांव में इकलौता हैंडपंप है। ग्रामीणों को पट्टे पर मिली जमीन में अब तक पट्टा नहीं मिला। अधिकांश परिवारों के राशनकार्ड नहीं बने।
40 हजार से ज्यादा घरों में अभी भी ताले
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में 29 अप्रैल को हमीरपुर, महोबा और बांदा के तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र में मतदान है। बांदा-चित्रकूट जिले में 6 मई को वोट पड़ेंगे। मतदान की ये तिथियां सिर पर आ जाने के बाद भी चारों जिलों में 40 हजार से अधिक घरों में अभी भी ताले पड़े हैं। ये परिवार अभी तक नहीं लौटे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसी माह चलाए गए पल्स पोलियो अभियान में टीमों ने घर-घर जाकर बच्चों को दवा पिलाने के लिए सर्वे किया है। इस सर्वे में यह बात सामने आई है कि मंडल के चारों जिलों में 40,365 घरों में ताले पड़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा 21,819 घर बांदा जिले के हैं। चित्रकूट में 8,944, महोबा में 5,690 और हमीरपुर में 3,912 घरों में ताले पड़े मिले। यानी मतदान के मौसम में भी इतनी बड़ी संख्या में मंडल के मतदाता बाहर हैं।