बांदा। बुंदेलखंड में रोजगार पाने की मारामारी और कम होने वाली। इसी कड़ी में अब रंग-बिरंगी और आकर्षक सजावटी मछलियां भी बुंदेलियों के लिए रोजगार का जरिया बनने वाली हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में प्रावधान किया गया है। पूरे प्रदेश सहित बुंदेलखंड के सातों जनपदों बांदा, महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, ललितपुर और झांसी में इन मछलियों के प्रजनन और पालन (रियरिंग) की यूनिट स्थापित की जाएंगी।
इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। प्रत्येक यूनिट की लागत करीब 25 लाख रुपये होगी। यानी सातों जनपदों में पौने दो करोड़ रुपये से ये यूनिट बनाई जाएंगी। प्रत्येक यूनिट में तकरीब 15 लोग भी रोजगार से जुड़ सकेंगे। यानी 105 बुंदेलियों को सजावटी मछलियां रोजगार देंगी। योजना के लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। रंगीन मछलियों की मांग अधिक व उत्पादन कम होने पर इनकी कीमतें अधिक है। आम आदमी इनकी खरीद नहीं कर पा रहा है।
गौरतलब हो कि महानगरों की तर्ज पर बुंदेलखंड में भी शौकीन और संपन्न लोग अपने ड्राइंग रूम व व्यावसायिक शोरूम आदि में रंगीन मछलियों का एक्वेरियम सजा रहे हैं। यह शौक बेरोजगारों के लिए रोजगार का जरिया बन रहा है। इसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में शामिल कर लिया गया है। योजना के तहत हरेक जिले में एक यूनिट लगाई जाएगी। इसमें रंगीन/सजावटी मछलियों का प्रजनन और पालन होगा। एक यूनिट में लगभग 15 लोगों को रोजगार मिलेगा। लाभार्थी को प्रजनन व रियरिंग इकाई के लिए 40 से 60 फीसदी अनुदान पर 25 लाख रुपये का ऋण भी दिया जाएगा। एक साल तक ऋण में ब्याज भी नहीं लगेगा।
एक वर्ष तक ब्याज से छूट मिलेगी
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सामान्य वर्ग के लाभार्थी को यूनिट की कुल लागत में 40 फीसदी, अनुसूचित जाति के लोगों और महिलाओं के लिए 60 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। शेष राशि सात फीसदी ब्याज के साथ वसूली जाएगी। शुरू के एक वर्ष ब्याज नहीं लगेगा।
निजी भूमि में लगेगी इकाई
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में यूनिट स्थापना की शर्तों में यह शामिल है कि लाभार्थी की खुद की एक हेक्टेयर भूमि हो। इसके अलावा स्थापित यूनिट में सात नर्सरी, दो रियरिंग (पालन) तालाब, एक ओवरहेड टैंक, हैचिंग पूल, स्पान कलैक्शन पूल आदि भी बनाए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक यूनिट में दो क्विंटल मछलियों का तिमाही उत्पादन करने का लक्ष्य भी दिया जाएगा। मछलियों के प्रजनन के लिए आठ 15 फीट लंबे और चौड़े पॉड्स बनेंगे।
इन मछलियों का होगा उत्पादन
गोल्ड, रॉयल पैट, पैरेट, ईगल ग्लोबल, सिचलिड, ट्रोफिकल, ब्लैक मूर, शार्क, रेड कैप आदि।
महानगरों से आती हैं रंगीन मछलियां
बुंदेलखंड के कई जिलों में अभी तक कोलकाता, मुंबई और लखनऊ से रंगीन मछलियां लाई जाती हैं। प्रति मछली की लागत एक से दो रुपये है। जब यूनिट की स्थापना हो जाएगी तो मछली पालने वाले शौकीनों को रंगीन मछलियां यहीं पर सस्ते दर पर उपलब्ध होंगी।
हर यूनिट में डेढ़ दर्जन लोगों को रोजगार
बुंदेलखंड में रंगीन मछलियों के प्रजनन और पालन यूनिट में लगभग डेढ़ दर्जन लोगों को रोजगार मिलेगा। सात कर्मचारी नर्सरी, दो कर्मचारी रियरिंग पोंड, एक कर्मचारी स्पान फूल, हैचिंग पूल, स्यान कलेक्शन पूल में नियुक्त होंगे। एक यूनिट में होने वाले मछली उत्पादन से छह लोग व्यवसाय कर सकेंगे। इससे काफी बेरोजगारों को रोजगार भी मुहैया होगा, साथ ही आय के साधनों में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे रोजगार पाने वालों का जीवनयापन हो सकेगा।
तीन फरवरी को लाभार्थियों का चयन
इकाई की स्थापना के लिए 31 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। शासन के आदेश पर प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित 11 सदस्यीय समिति तीन फरवरी को लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई करेगी।
चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में रंगीन मछलियों के प्रजनन व पालन (रियरिंग) यूनिट स्थापना के लिए डेढ़ दर्जन से अधिक आवेदन आए हैं। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित 11 सदस्यीय समिति 3 फरवरी को लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई करेगी।
-ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक निदेशक, मत्स्य, बांदा।