बांदा। गाटा संख्या 1058, 1059, 1080, 1096 और 1075 के विभाजन से जुड़े मामले में आयुक्त न्यायालय ने एसडीएम बबेरू के आदेश को त्रुटिपूर्ण और विधि विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया।
न्यायालय ने प्रकरण को दोबारा अवर न्यायालय भेजते हुए कुर्राफांट पर पक्षों की आपत्ति और प्रतिआपत्ति पर सुनवाई कर गुण-दोष के आधार पर आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में अपीलकर्ता रामबिहारी ने एसडीएम बबेरू के 26 सितंबर 2025 के आदेश के खिलाफ अपील की थी। उनका तर्क था कि अधीनस्थ न्यायालय ने कुर्राफांट (विभाजन योजना) को सरसरी तौर पर निरस्त कर दिया और अंशों पर ही विचार किया। उन्होंने कहा कि कुर्राफांट असंतुलित था और विपक्षी जागेश्वर लंबे समय से कुछ गाटों पर काबिज है। अपीलकर्ता ने गाटा संख्या 1080 में अपने कब्जे वाले हिस्से का रकबा दिए जाने की मांग की थी।
विपक्षी के अधिवक्ता ने कहा कि वाद भूमि दोनों पक्षों के संयुक्त नाम से खतौनियों में दर्ज है और दोनों का बराबर अंश है। यह भी तर्क दिया गया कि परीक्षण न्यायालय में नियम 109(8)घ की कार्रवाई चल रही है, इसलिए उसके अंतिम निस्तारण तक अपील धारणीय नहीं है।
आयुक्त न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद पाया कि अवर न्यायालय ने कुर्राफांट पर कोई विवेचना नहीं की, जबकि दोनों पक्षों ने आपत्ति और प्रतिआपत्ति प्रस्तुत की थी। इसी आधार पर एसडीएम का निर्णय निरस्त कर दिया गया। न्यायालय ने 2 जुलाई 2025 के कुर्राफांट पर प्रस्तुत आपत्ति और प्रतिआपत्ति पर पुनः सुनवाई कर आदेश पारित करने के लिए कहा है।