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सिर्फ नौ ने सरेंडर किए शस्त्र, 103 को फिर नोटिस

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बांदा। तीसरा लाइसेंसी शस्त्र नोटिस के बाद भी जमा न करने पर जिले के 103 शस्त्र लाइसेंसधारकों को डीएम ने पुन: नोटिस जारी किया है। पिछले माह जारी नोटिस के बाद मात्र नौ लाइसेंसधारकों ने अपने एक-एक शस्त्र सरेंडर किए हैं। इनमें सपा राज्यसभा सांसद और पूर्व राज्य मंत्री भी शामिल हैं।
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आर्म्स एक्ट-1959 में संशोधन के बाद अब कोई व्यक्ति दो ही लाइसेंसी शस्त्र रख सकता है। हाल ही में प्रदेश के गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर तीन शस्त्र रखने वालों से एक-एक शस्त्र वापस लेने के आदेश दिए थे। जिले में तीन लाइसेंसी शस्त्र रखने वालों की संख्या 112 है। गृह मंत्रालय के आदेशों के बाद पिछले माह डीएम अमित सिंह बंसल ने जिले के तीन शस्त्र धारकों को नोटिस जारी कर 15 दिन में तीसरा लाइसेंस सरेंडर करने को कहा था।
नोटिस के बाद जिले के मात्र 9 शस्त्र धारकों ने अपना एक-एक लाइसेंस और असलहा सरेंडर कर दिया है। इन्होंने अपने असलहे और कारतूस आदि शस्त्र विक्रेताओं की दुकान में जमा किए हैं, जबकि कुछेक ने थानों को शस्त्र सौंपे हैं। लाइसेंस की मूल कापी कलक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग में जमा की है। उधर, अब तक तीसरा शस्त्र जमा न करने वाले 103 लाइसेंस धारकों को जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पुन: नोटिस किए जा रहे हैं। डीएम ने कहा है कि नोटिस के बाद भी शस्त्र जमा न करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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इन्होंने सरेंडर किया तीसरा शस्त्र लाइसेंस
1. सांसद (राज्यसभा) विशंभर प्रसाद निषाद- दोनाली 12 बोर बंदूक।
2. अच्छेलाल निषाद (पूर्व राज्यमंत्री), बड़ागांव- दोनाली 12 बोर बंदूक।
3. वजाहुद्दीन सिद्दीकी (खाईंपार)- दोनाली 12 बोर बंदूक।
4. रमेशचंद्र साहू (शुतुरखाना)- दोनाली 12 बोर बंदूक।
5. ब्रजकिशोर (भरखरी)- दोनाली 12 बोर बंदूक।
6. गयासुद्दीन खां (मर्दन नाका)- राइफल 315 बोर।
7. आफताफ अहमद खां (मर्दननाका)- दोनाली 12 बोर बंदूक।
8. अशोक वर्मा (लोधू थोक, अतर्रा)- दोनाली 12 बोर बंदूक।
9. रामबहादुर यादव (मटौंध)- एक नाली 12 बोर बंदूक।
जिले में लाइसेंसी शस्त्रों की संख्या
राइफल 3200
एकनाली व दोनाली (12 बोर) 5000
रिवाल्वर/पिस्टल 2000
कुल असलहे 10,253
सूचना देने से शस्त्र अनुभाग ने पल्ला झाड़ा
बांदा। शस्त्र लाइसेंसों के जारी करने में हमेशा खेल होता रहा है। यहां सोर्स सिफारिश या पैसे के बूते पर लाइसेंस जारी होते रहे हैं। सबसे ज्यादा लाइसेंस सत्तारूढ़ दल के नेताओं की सिफारिशों पर बनाए जाते हैं। शायद यही सब कारण हैं कि यहां के शस्त्र प्रभारी/शस्त्र अनुभाग लाइसेंसों के बाबत अधिकांश जानकारियां छिपाता है। यहां तक कि जनसूचना अधिकार अधिनियम जैसे एक्ट में सूचना न देकर गोलमोल जवाब दिया जाता है। इसकी ताजी बानगी आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला द्वारा मांगी गई सूचना पर तीन दिन पूर्व 20 जुलाई को प्रभारी अधिकारी (शस्त्र)/अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) की दी गई सूचना है।
कुलदीप शुक्ल ने सूचना मांगी थी कि जिले में महिला शस्त्र लाइसेंस धारक कितनी हैं? उनके नाम व शस्त्र पूछे थे। प्रभारी अधिकारी ने इस सूचना को प्रश्न अस्पष्ट बताकर पल्ला झाड़ लिया। साथ ही तीन शस्त्रधारकों के नाम-पते और देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि यह सूचना अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 8(1)(छ) आदि के अंतर्गत आच्छादित है। इसी तरह मांगी गई यह सूचना कि पूर्व डीएम द्वारा कितने लाइसेंस दिए गए? इसे भी उपरोक्त धारा का हवाला देकर जानकारी नहीं दी।
अलबत्ता यह बताया है कि जिले में कुल शस्त्र धारकों की संख्या 10,253 है और शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण की अवधि पांच वर्ष है। आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप ने बताया कि उन्होंने जिले के शस्त्र विक्रेताओं की सूची भी मांगी थी। इस पर उन्हें मिले पत्र में लिखा है कि सूची नत्थी है, जबकि कोई सूची नत्थी नहीं है। लाइसेंस के लिए कितने आवेदन लंबित हैं? इस पर इतनी सूचना दी गई है कि वर्तमान में लागू ऑनलाइन प्रक्रिया के अंतर्गत कोई आवेदन प्राप्त नहीं हैं।
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