बांदा। जिला अस्पताल व रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विभाग की ओपीडी मेडिसिन विभाग के हवाले है। दोनों अस्पतालों में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से मरीजों को कानपुर और लखनऊ में दिखाना मजबूरी है। मेडिसिन विभाग के डॉक्टर भी मरीजों को दवा लिखकर कानपुर में दिखाने की सलाह देते हैं।
जिला अस्पताल में वर्तमान में वर्तमान में 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, इनमें 17 की तैनाती है, 11 पद रिक्त चल रहे हैं। इसी तरह से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में 107 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, इनमें 64 ही कार्यरत हैं। जिले में सबसे ज्यादा दिक्कत हृदय रोग, गुर्दा रोग विशेषज्ञ, बालरोग सर्जन, न्यूरो सर्जन आदि की है। इन डॉक्टरों के न होने मरीजों को प्रतिदिन दवा तो मिल जाती है, पर पूरा इलाज नहीं हो पाता है। मजबूरी में उन्हें कानपुर और लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ती है। दोनों अस्पतालों में प्रतिदिन 20 से 30 रोगी हृदय रोग के आते हैं। जांच के आधार पर सात से आठ गंभीर मरीजों को रेफर करने का आंकड़ा है।
जांच के नाम पर होता ईसीजी
बांदा। जिला अस्पताल में तीन साल पूर्व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केएल पांडेय के सेवानिवृत्त हो जाने पर यह पद रिक्त चल रहा है। चिकित्सक संविदा डॉ. शिशिर चतुर्वेदी फिलहाल हृदय रोगियों को देखते हैं। इसी तरह से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के डॉक्टर ही हृदय रोगियों का इलाज करते हैं। जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में इलाज के नाम पर सिर्फ ईसीजी की व्यवस्था है।
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ईसीजी करके दी कानपुर में दिखाने की सलाह
शहर के सिविल लाइन मोहल्ला निवासी अजीत कुमार ने बताया कि रात में उन्हें पसीना आने के साथ घबराहट हो रही थी। सुबह होने पर वह हृदय रोग विभाग में दिखाने आए हैं। यहां ईसीजी जांच कराई है। डॉक्टर ने कानपुर दिखाने की सलाह दी है।
महेश्वरी देवी मंदिर के पास रहने वाली अर्चना ने बताया कि उन्हें ब्लड प्रेशर और घबराहट हो रही थी। हृदय रोग में फिजिशियन डॉक्टर को दिखाया है। ईसीजी कराने के कहा है। जांच के बाद ही वह कुछ बता पाएंगे।
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विशेषज्ञों की कमी
-हृदय रोग विशेषज्ञ
-गुर्दा रोग विशेषज्ञ
-रेडियोलॉजिस्ट
-न्यूरो सर्जन
-पिडियाट्रिक सर्जन
-दंत रोग विभाग
-त्वचा एवं चर्म रोग विशेषज्ञ
-चेस्ट फिजिशियन
वर्जन
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शासन को पत्र लिखकर डॉक्टरों की मांग की गई है। फिलहाल मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों से मरीजों का उपचार कराया जाता है। गंभीर मरीज को कानपुर के लिए रेफर किया जाता है।
डॉ. एसके कौशल
प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
शासन से लगातार पत्राचार चल रहा है। रिक्त पदों को शासन से स्वीकृति मिलने पर भरा जाएगा। फिलहाल मरीजों को बेहतर इलाज किया जा रहा है।
डॉ. के. कुमार
सीएमएस, जिला अस्पताल पुरुष
फोटो- 13 जिला अस्पताल में ह्दय रोग की ओपीडी करते डॉ. शिशिर। संवाद
फोटो- 13 जिला अस्पताल में ह्दय रोग की ओपीडी करते डॉ. शिशिर। संवाद
फोटो- 13 जिला अस्पताल में ह्दय रोग की ओपीडी करते डॉ. शिशिर। संवाद
फोटो- 13 जिला अस्पताल में ह्दय रोग की ओपीडी करते डॉ. शिशिर। संवाद
फोटो- 13 जिला अस्पताल में ह्दय रोग की ओपीडी करते डॉ. शिशिर। संवाद