बांदा। राष्ट्रपति द्वारा तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं की कम भागीदारी पर चिंता जताना बेसबब नहीं है। वीरांगना लक्ष्मीबाई की शोहरत से जुड़ी बुंदेलखंड की धरती भी इससे अछूती नहीं है। यहां तकनीकी शिक्षा में अभी भी महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी नहीं हो पाई।
नारी मिशन शक्ति जैसे महिला प्रेरणा की चल रही तमाम योजनाओं के बावजूद मंडल मुख्यालय बांदा जिले में तकनीकी शिक्षा केंद्र औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में मात्र 20 फीसदी छात्राओं ने दाखिला लिया है।
ये बुंदेली छात्राएं संदेश दे रही हैं कि हम किसी से कम नहीं। आमतौर पर पुरुषों द्वारा अपनाए जाने वाले जॉब का तकनीकी प्रशिक्षण छात्राएं ले रही हैं। जिले में मुख्यालय स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सहित जनपद में कुल पांच राजकीय आईटीआई संचालित हो रहे हैं।
आईटीआई महिला पुरुष योग
बांदा 165 295 460
पैलानी 45 153 198
बबेरू 79 206 285
बांसी 138 200 338
मोतियारी 40 247 287
योग 467 1101 1568
फिटर ट्रेड से दो वर्ष का प्रशिक्षण ले रहीं प्रियंका चौरसिया का कहना है कि रेलवे में जॉब की काफी संभावनाएं हैं। फिटर ट्रेड इसी से जुड़ा हुआ है। इंजीनियरिंग क्षेत्र में यह ट्रेड ए-ग्रेड में शामिल है। इसीलिए वह मेहनत से भरपूर ट्रेड होने के बाद भी इसका प्रशिक्षण ले रही हैं। उसके साथ पांच अन्य छात्राएं भी यह प्रशिक्षण ले रही हैं।
पेंटर का प्रशिक्षण ले रही सुरभि रैकवार का कहना है कि राष्ट्रपति की यह बात बिल्कुल सच है कि तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की संख्या कम है। यह बात आईटीआई में भी लागू है। उसके साथ मात्र तीन प्रशिक्षार्थी महिलाएं हैं। रेलवे में जॉब का रास्ता खुलता है।
मैकेनिक डीजल का प्रशिक्षण ले रहीं खुशबू देवी का कहना है कि ऐसा कौन सा जॉब है जो महिलाएं नहीं कर सकतीं। मैं और मेरे साथ आठ बालिकाएं डीजल मैकेनिक का प्रशिक्षण ले रही हैं। जबकि यह ट्रेड पुरुषों के लिए कहा जाता है। हमें सफलता मिली तो अपने इस प्रशिक्षण के बदौलत ट्रेन की लोको पायलट भी बन सकते हैं।
हिमांशी गुप्ता कारपेंटर का प्रशिक्षण ले रही हैं। उसका कहना है कि यह तकनीकी प्रशिक्षण है। इसे वह बखूबी सीख रही है। मुख्य उद्देश्य इस ट्रेड से जुड़े क्षेत्र में जॉब हासिल करना है। खासकर रेलवे और रक्षा विभाग में कारपेंटर जॉब की काफी संभावनाएं हैं।
Only 20 percent Bundeli women are taking technical training- फोटो : BANDA