चित्रकूट। जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को खून की जांच कराने के लिए दो दिन चक्कर लगाना पड़ता है। इससे महिलाओं को आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, विभाग जांच रिपोर्ट तत्काल मोबाइल पर भेजने की बात कहता है, जबकि अभी तक किसी भी मरीज के मोबाइल में रिपोर्ट नहीं आई है।
जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं काे एएनसी (प्रसवपूर्व) जांच करानी पड़ती है। इसमें गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे के स्वास्थ्य का आकलन किया जाता है। इसमें खून की जांच, वजन, अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। तब पूरी प्रक्रिया होती है। सुबह करीब नौ बजे कर्वी की गर्भवती अर्चना देवी अपनी दूसरी जांच कराने पहुंचीं। डॉक्टर ने खून की जांच, वजन व अल्ट्रासाउंड लिखा।
पैथोलॉजी कक्ष पहुंची तो पंजीयन कराने के बाद अपने बारी का इंतजार करने लगीं। अर्चना देवी के मुताबिक इस दौरान कर्मचारी मोबाइल में व्यस्त रहे। महिला ने रक्त जांच के लिए कहा तो अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए डांट दिया। कुछ देर बाद खून निकालने के बाद दूसरे दिन आने की बात कहकर लौटा दिया।
बनकट की ललिता ने बताया कि वह खून का सैंपल देने के बाद जांच रिपोर्ट के बारे में पूछा तो कर्मचारी ने कहा कि जाओ यहां से, आज रिपोर्ट नहीं मिलेगी, कल आना। महिला ने गर्भवती होने की बात कही तो कर्मचारी ने डांट कर भगा दिया। यहीं हाल अन्य गर्भवती महिलाओं के साथ किया गया। इससे गर्भवती महिलाओं को अस्पताल आने में दिक्कतें हो रही हैं।
बुखार पीडि़त श्रेयांश के तीमारदार महेश ने बताया कि बेटे के खून की जांच कराने के लिए कक्ष में गया तो वहां सैंपल लेने के बाद रिपोर्ट लेने के लिए दूसरे दिन आने की बात कही। इससे पूरा इलाज नहीं हो सका। बताया कि अधिकारी से शिकायत की तो अधिकारी ने कहा कि मोबाइल पर जांच रिपोर्ट मिल जाएगी, जबकि रिपोर्ट नहीं मिली। वहीं कक्ष में तैनात कर्मचारी ने बताया कि नेटवर्क खराब होने से रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है।
जिम्मेदार बोले-अभी लिखित शिकायत नहीं मिली
सीएमएस डाॅ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को खून की जांच में परेशानी न हो, इसके निर्देश दिए गए हैं। महिलाओं के साथ कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार की लिखित शिकायत नहीं मिली है। जांच होते ही मोबाइल पर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। किसी मरीज को देरी हो रही हो तो वह अपना मोबाइल नंबर कर्मचारी को बताकर रिपोर्ट ले सकता है।