‘डूबे न जो कभी वो सितारा हुसैन हैं, दुनियां कह रही है हमारे हुसैन हैं’। कर्बला के मैदान में मोहर्रम की 9वीं रात पैगंबरे इस्लाम के नवासे और उनके 72 साथियों पर सबसे ज्यादा भारी पड़ी। बादशाह यजीद की फौज ने एक-एक कर इन सभी को इस रात शहीद कर दिया। इनमें मासूम बच्चे और प्यासे लोग भी थे। इस रात की याद मंगलवार को यहां अलाव, ढाल, ढोल-ताशा और बाजेगाजों से की गई। रात भर कई इलाकों में मेले जैसा हाल रहा। शहर और कस्बों में एक सैकड़ा ज्यादा स्थानों पर दहकते अंगारों के अलाव खेले गए। इसके पूर्व सुबह कोतवाली के सामने आखिरी दिन ताजियों का मिलाप हुआ।
लगातार नौ दिनों से मोहर्रम के आयोजन चल रहे हैं। नवमीं पर सुबह कोतवाली के सामने कुल आठ ताजिए इकट्ठा हुए। इनमें कल्लू हाजी व रज्जू छीपा (कलामतपुरा), सईद वकील (छिपटहरी), कल्लू घड़ी साज (छावनी), बब्बू ठेकेदार (कटरा), संदल शाह (अर्दली बाजार) और मरहूम एजाज (मर्दननाका) के ताजिए शामिल थे। मिलाप की रस्म के बाद जुलूस की शक्ल में यह सब ताजिए अपने-अपने ठिकानों (इमामबाड़ों) में ले जाकर रख दिए गए। मोहर्रम कमेटी संरक्षक मोहम्मद शोएब, अध्यक्ष अब्दुल वहीद, मोहम्मद अजीज उर्फ अज्जन, महबूब आलम इत्यादि शामिल रहे।
उधर, रात गहराते ही इमामबाड़ों में ढोल ताशे गूंज उठे। यहां अलाव भी जलाए गए। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक और सौहार्द का संदेश देने वाले मशहूर रामा के इमामबाड़े में सबसे ज्यादा भीड़ रही। अकीदतमंदों ने यहां फातेहा दिलाई। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। अलीगंज, मर्दननाका, अमर टाकीज तिराहा, कुंजरहटी, कालवनगंज, छिपटहरी, क्योटरा क्रासिंग, निम्नीपार, हाथीखाना, फकीरन मोहाल, खाईपार, छावनी, गूलरनाका, खुटला इत्यादि इलाकों में मेला का नजारा रहा। यहां सजावट भी की गई। कानफोड़ू डीजे में मरसिए और कव्वालियां गूंजती रहीं। चाय आदि के लंगर हुए। उधर, बसपा नेता मुमताज अली ने खूंटी चौराहे में चाय का लंगर किया। सिटी मजिस्ट्रेट प्रहलाद सिंह, क्षेत्राधिकारी राकेश कुमार मिश्र, निरीक्षक केपी सिंह, उप निरीक्षक शेरे आलम, संजय सिंह आदि सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे।