बांदा। महानगरों से लौटकर सीधे अपने घरों में शरण लिए प्रवासी मजदूरों की खोजबीन और उन्हें क्वारंटीन सेंटर भेजने का सिलसिला जारी है। बुधवार को लॉकडाउन के 15 वें दिन ऐसे 17 मजदूरों को राजस्व विभाग की टीमों ने खोज कर उनका सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इसके बाद उन्हें क्वारंटीन सेंटरों के हवाले कर दिया गया। उधर, बुधवार को कोई नया संभावित संक्रमित मेडिकल कालेज या अन्य अस्पतालों में भर्ती नहीं किया गया।
जनपद में बनाए गए 36 क्वारंटीन सेंटरों में अब रखे गए लोगों की संख्या बढ़कर 8507 हो गई है। यह सब 14 दिन यहां रखे जाएंगे। उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है। बुधवार को यहां विकास भवन में चल रहे कंट्रोल रूम को मिली सूचना पर राजस्व टीमों ने बबेरू व बिसंडा क्षेत्रों में 17 मजदूरों को उनके घरों से खोज निकाला। यह महानगरों से लौटे और बिना स्वास्थ्य चेकअप कराए घरों में आ गए थे। जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इनका स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया है। इनमें दो मजदूर बांदा शहर के बिजली खेड़ा मोहल्ले के हैं।
पाजिटिव की आज आएगी जांच रिपोर्ट
बांदा। दूसरी जांच में निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद अब शहर के गूलरनाका निवासी जमाती का तीसरा नमूना बुधवार को लखनऊ भेज दिया गया। इसके साथ ही दूसरे पाजिटिव जमाती (शिव गांव निवासी) का दूसरा नमूना (सैंपल) भेजा गया है। दोनों की रिपोर्ट बृहस्पतिवार (9 अप्रैल) को आइगी। इन दोनों के परिजनों की दो दिन पहले ही निगेटिव रिपोर्ट आ चुकी है। राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि बुधवार को कोई नया मरीज क्वारंटीन या आइसोलेशन वार्ड में भर्ती नहीं हुआ है।
आइसोलेशन वार्ड में पुराने पांच रोगी ही भर्ती हैं। इनमें मात्र एक ही घोषित रूप से पाजिटिव है। उन्होंने यह भी बताया कि मंगलवार को यहां क्वारंटीन वार्ड से मुक्त किए गए 34 लोगों को कृषि विश्वविद्यालय में बनाए गए विशेष क्वारंटीन कक्ष में 14 दिन रखा जाएगा। लेकिन किसी विश्वविद्यालय में तैयारी पूरी न होने पर बुधवार की शाम तक यह सभी यहां मेडिकल कालेज में ही हैं।
दो दिन का डेढ़ लाख बजट, दिन में सिर्फ तहरी
बांदा। गरीबों भर पेट खाना खिलाने के दावें हवा हवाई साबित हो रहे हैं। शहर के खिन्नीनाका कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) में दिन में सिर्फ तेहरी मिलती है। शाम को पूड़ी सब्जी मिलती है। इसका संचालन सदर तहसील कर रही है। तहसील प्रशासन को दो दिन का बजट डेढ़ लाख रूपया दिया गया है। तहसीलदार अवधेश निगम ने का कहना है सुबह तहरी के बाद खाना दिया जाता है। शाम को पूड़ी सब्जी दी जाती है।