मृतक किसान बड़कू कुशवाहा। (फाइल फोटो)
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ओला और अतिवृष्टि से फसल को पहुंचे भारी नुकसान और सरकार द्वारा अब तक भरपाई न किए जाने से सदमे का शिकार हो रहे किसानों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। ताजी घटना में दो और किसानों की मौत हो गई। उन पर कर्ज भी था।
नरैनी तहसील के बड़ोखर बुजुर्ग गांव में किसान बड़कू कुशवाहा अपनी सवा बीघे और बंटाई की आठ बीघा का काश्तकार था। इसमें उसने मसूर और चना की बुआई की थी। मसूर तैयार होने की स्थिति में थी। चना भी हरा-भरा था। इसी बीच 12 फरवरी को पड़े ओलों ने फसल को मटियामेट कर दिया। बड़कू तब से खेत नहीं जा पा रहा था। मंगलवार को सुबह वह खेत गया तो फसल की हालत देखकर उसे गहरा सदमा लगा और वहीं दिल का दौरा पड़ गया। आसपास के अन्य किसानों ने उसे घर पहुंचाया। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग करके कानपुर भेजने की व्यवस्था कर दी, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। मृतक के पास खुद का मकान भी नहीं था। वह पड़ोसी रमेश के मकान में रहता था।
ग्रामीणों के मुताबिक 20 हजार रुपये साहूकारों से कर्ज ले रखा था। इस बाबत नरैनी एसडीएम नरेश कुमार ने बताया कि वह तहसीलदार को भेजकर जांच करवा रहे हैं। नियमानुसार संभव मदद दी जाएगी।
दूसरी घटना में सदर तहसील क्षेत्र के जारी गांव में किसान श्रीपाल (53) मंगलवार की दोपहर खेत गया था। वहां ओलावृष्टि से 5 बीघे में चना व मसूर की फसल चौपट देखकर उसकी हालत बिगड़ गई। गंभीर अवस्था में परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम हाउस पर भतीजे सुशील ने बताया कि श्रीपाल पर बैंक का एक लाख रुपये व गांव में साहूकारों का लगभग 50 हजार रुपये कर्ज था। कर्जमाफी योजना में नाम शामिल था, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र नहीं मिला। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। तहसीलदार अवधेश कुमार निगम ने बताया कि लेखपाल द्वारा जानकारी मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद संभव मदद की जाएगी।